Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जिन्दगी.....जब तेरी याद

कुछ इस रफ्तार से चला मै जिन्दगी , तेरी याद आने पर भी मुड न सका में कभी
इन चंद लफ्जो मे मै बया कर गया मै जिन्दगी मुस्कराता रहा मै जब देखा तुझे जिन्दगी
आज जब भी मै जिन्दगी को थोडा ठहर जाने की गुजारिश करता हुँ तो लगता है ठहर कर भी वक्त रुकता नही है । भागती , दौडती जिन्दगी का एक दशक न जाने कैसे निकल गया , न कुछ यादे रही न कुछ अविसमरणीय पल , लगता है कि वो दशक कम्पूयटर क्राति की आंधी में उड गया है । विषय वार तो मैने बहुत कमाया पर बौधिक और आध्यमिक स्तर पर दशक पछिड गया हुँ । आत्म सन्तुष्टि से कही दूर आजकल मेरी जिन्दगी कभी न खत्म होने वाली कानून की विवेचना बन कर रह गयी है ।
कूछ चाहता हुँ ......... भीड में भी अकेला रहना चाहता हुँ , पूरानी यादों को फिर से दोहराना चाहता हुँ , सुबह उठ फिर से गुनगुनाते सैर पर जाना चाहता हुँ , ओंस की बूदों का ...चिडियों के गानों का फिर से लुफ्त उठाना चाहता हुँ , दिन में यारों संग कधे में हाथ डालकर दिल की बातें करना चाहता हुँ , अपनी माँ के संग रसोइ मे खाना बनाते खुद को देखना चाहता हुँ , फिर से रजनी के सौन्दय को देखना महसूस करना चाहता हुँ । चाहते तो मेरी बहुत है पर ये भी जानता हुँ कि वक्त आपके अनुसार दोहराया नही जायेगा , फिर भी .......चाहता हुँ जिन्दगी , तेरी रुकसत पर भी रोना न आये फिर कभी ...

आपने जीवन

आपने जीवन की जिन गहराइयों का जिक्र किया है उन गहराइयों की तह को समझ पाने का साहस तो मैं नहीं कर सकता | पर इतना तो समझ में आता है कि आपने जीवन की गहराइयों को बहुत अच्छी प्रकार से छू लिया है | जीवन बस इसी का नाम है | चलते रहो, चलते रहो | "चरेवैती, चरेवैती" रुकना जिन्दगी नहीं है | हाँ बदलना ही है तो राहों को बदल लो, अपने द्दृष्‍टिकोण को बदल लो | जीवन बहुत मधुर है, बहुत अमूल्य है | इसे जानना, इसे पाना, इसे पाकर परमात्मा तक दौड़ लगाना, यही सब कुछ है | यह अनन्त है | यह अविस्मरणीय है |

आनन्द‌

|| औम्

|| औम् ||

बहुत् ही उमदा.

प्रुशत्