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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

'गडबडाध्याय'

आर्य समाज को स्थापित करते समय ही ऋषि दयानंद ने मुंबई में यह आशंका व्यक्त की थी कि अगर यथोचित व्यवस्था नहीं रखोगे तो आगे चलकर यह 'गडबडाध्याय' हो जायेगा. क्या अब भी हमको ऐसा नहीं लगता कि सच ही में 'गडबडाध्याय' तो हो ही गया है ? यथोचित व्यवस्था अनुसार न चलने वाली स्वयं स्थापित पाठशालाएँ उन्होंने स्वयं बंद कर दी थी यह हम सब लोग जानते ही है.
= भावेश मेरजा

प्रश्न यह

प्रश्न यह है कि आज इस गड़बड़ाध्याय को समाप्त करने के लिये कितने आर्य इच्छा रखते हैं, और रखते हैं तो वे उसको दूर करने के लिये आगे क्यों नहीं आते हैं ? वे मिलकर चलने, एक व्यवस्था बनाने का प्रय‌त्न क्यों नहीं कर रहे हैं ? कुछ लोग गलती ‍पर हो सकते है पर सब को तो गलती नहीं करनी चाहिये |