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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेदाध्ययन 0

महर्षि ने वेदों का पढना पढाना आर्यों का परम धर्म बताया. समाज और विश्व को कल्याण मार्ग पर चलने के लिए वेदो का महत्व महर्षि की सोच मे सर्वोपरि था.
आर्यसमाज के मंतव्यो से प्रेरित कितने ही गुरुकुल चलाए जा रहे हैं. परंतु विरले ही ऐसे गुरुकुल होंगे जिन मे वेदाध्ययन नियमित रूप से विद्यार्थियों को कराया जा रहा है. क्या ऐसा सम्भव हो सकता है एक योजना ऐसी बनाइ जाए जिस के अंतर्गत, आधुनिक्ल कृषि और यांत्रिक तथा भौतिक विज्ञान के शिक्षित आर्य बंधु आसपास के किसी गुरुकुल उदाहरणा के लिए नोएडा गुरुकुल मे जा कर मास मे एक या दो दिन गुरुकुल के उच्च कक्षाओं के ब्रह्मचारियों और संस्कृज्ञ अचार्यों के साथ बैठ कर वेदों के अध्ययन का एक प्रयास आरम्भ कर सके?
व्यक्यिगत तौर पर मै स्वयम ऐसी योजना से जुड्ना चाहूँगा.

यह एक अति

यह एक अति महत्त्वपूर्ण प्रयास होगा | आशा है सभी वैज्ञानिक सोच रखने वाले आर्य एवं वैदिक विद्वान यदि एक साथ मिलकर जगह जगह यह प्रयास आरम्भ कर दें, तो हमारे देश में एक नई वैज्ञानिक क्रान्ति का सूत्रपात हो सकता है |

आनन्द‌