Warning: Table 'aryasi8x_db1.cache_page' doesn't exist query: SELECT data, created, headers, expire FROM cache_page WHERE cid = 'http://www.aryasamaj.org/newsite/node/106' in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc on line 174

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc:174) in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/bootstrap.inc on line 569

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc:174) in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/bootstrap.inc on line 570

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc:174) in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/bootstrap.inc on line 571

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc:174) in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/bootstrap.inc on line 572
ज्ञ।न सूर्य का अवतरण‌ | Aryasamaj
Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ज्ञ।न सूर्य का अवतरण‌

warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/database.mysql.inc:174) in /home/aryasi8x/public_html/newsite/includes/common.inc on line 141.

ज्ञ।न सूर्य का हुआ अवतरण जब धरती पर
था सृष्टी का आदि काल वह
प्रथम सूर्य की किरणो के संग , मानव जब धरती पर उतरा
ज्ञ।न सूर्य की किरणे थी सं‍ग
वरना बुद्धि कुण्ठित रहती
बिना शब्द वा बिना ज्ञ।न के क्या कर पाती
कर्ण शब्द बिन क्या सुन पाते , क्या मुख कह्ते
चक्षु द्रृष्टि से देख तो पाते , समझ न पाते

कैसी होती सृष्टि ऐसी
करुण कहानी मानव की या,
किसी अधूरे कलाकार की रचना होती

कैसी होती यदि बन्दर मानव का अग्रज बन
हरी भरी धरती पर उछल कूद दिखाता
और धरा सूर्य का रचने वाला
मानव के बनने की बाट ताकता
कि बन्दर जब मानव बन जाएगा
तब जाऊँगा धरती पर अवतार बनकर
मानव को मानवता का मैं पाठ पढ़ाने
सूर्य धरा और चान्द सितारे तो आते थे मुझे बनाने
पर ज्ञ।न सूर्य को बना न पाया
अत: स्वयं धरती पर अब उतरा हूँ
हुई भूल जो सृष्टि की आदि में
किसी तरँह से उसको अब सुलझाने ||