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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेदों मे हृदय रोगका अधुनिक विज्ञान

Bounties from Sun ( Role in human health)

RigVed 1-125-1

प्राता रत्नं प्रातरित्वा दधाति तं चिकित्वान् प्रतिगृह्या नि धत्ते
तेन प्रजां वर्धयमान आयू रायस्पोषेण सचते सुवीर: ऋ 1-125-1
प्रातःकाल का सूर्य उदय हो कर बहुमूल्य रत्न प्रदान करता है। बुद्धिमान उन रत्नों के महत्व को जान कर उन्हें अपने में धारण करते हैं।
तब उस से मनुष्यों की आयु और संतान वृद्धि के साथ सम्पन्नता और पौरुष बढ़ता है।
(वैज्ञानिकों के अ¬नुसार केवल UVA किरणें , जो तिरछी पृथ्वी पर पड़ती हैं ( संधि वेला प्रातः सायं की सूर्य की किरणें ही विटामि¬न डी उत्पन्न करती हैं।)

RV1-50-11
RV 1-50-1
उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतव: ! दृषे विश्वाय सूर्यम् !! ऋ 1/50/1
उदय होते सूर्य की किरणें जातवेदसं ईश्वर की कृपा से उत्पन्न कल्याणरी पदार्थॉं के वाहक के रूप मे प्राप्त होती हैं, जब विश्व के लिए सूर्य दृष्टीगोचर होता है.

उद्यन्नद्य मित्रमह आरोहन्नुत्तरां दिवम् !
हृदरोगं मम सूर्यं हरिमाणं च नाशय !! ऋ 1-50-11
दिवस के उदय को प्राप्त होते हुए, मित्रों में महासत्कार के योग्य उदय होते हुए सूर्य और हरियाली (greenery - by photosynthesis) से हमारे हृदय और दूसरे हरणशील (पीलिया) आदि रोगों का ¬नाश होता है ।
( ¬नवजात शिशु सामान्य रूप से आज कल पीलिया -jaundice रोग से ग्रसित होते हैं। आधुनि¬क अस्पतालों में बच्चों की ¬नर्सरी में कृत्रिम सूर्य के प्रकाश का प्रबं¬ध होता है । कोई कोई चिकित्सक ¬नवजात बच्चे को सूर्यस्¬नान भी कराते हैं )

शुकेषु मे हरिमाणं रोपणाकासु दध्मसि ।
अथो हारिद्रवेषु मे हरिमाणं निदध्मसि ॥ ऋ 1-50-12 , अथर्व 1-22-4

रोपित हरे व¬नस्पतियों कुशा घास हरे चारे इत्यादि पर पोषित दुग्ध में रोग हरण क्षमता है। इस लिए ऐसे हरे चारे पर पोषित (गौवों) के दुग्ध का आरोग्य के लिए सेव¬न करो।

आज विश्व के विज्ञा¬न शास्त्र के अनुसार केवल मात्र हरे चारे पर पोषित गौ के दुग्ध में ही CLA (Conjugated Linoleic Acid) और Omega 3 वांछित मात्रा मे आवश्यक वसा तत्व मिलते हैं। केवल यही दुग्ध मा¬नव शरीर के सब स्वज¬न्य रोग निरोधक और औषधीय गुण रखता है। इस स्था¬न पर वेदों में एक और आधुनिक वैज्ञानिक विषय photosynthesis प्रकाश संश्लेषण का उपदेश भी प्राप्त होता है। सब व¬नस्पति के बीजों में जो तैलीय तत्व होता है उसे वैज्ञानिक ओमेगा6, Omega 6 ¬नाम देते हैं। आज कल के सब प्रचलित रिफाइ¬न्ड खाद्य तेलों में मुख्यत: केवल ओमेगा6, Omegta 6 ही होता है। विज्ञा¬न बताता है की अंकुरित हो¬ने पर सूर्य के प्रभाव से photosynthesis प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से ओमेगा 6 हरे रं¬ग को धारण करता है जिसे आहार में ग्रहण कर¬ने पर ओमेगा 3 पोषक तत्व उपलब्ध होता है । यही गौ के पोषण मे हरे चारे का महत्व है।
(Omega 3 Is found to be anti obesity, anti cancer, anti artheschelorosis - heart and brain strokes due to clogging of arteries and High blood pressure, anti Diabetes in short preventive as well as a medicine against all Self degenerating Human diseases)
उदगादयमादित्यो विश्वे¬न सहसा सह।
द्विष¬तम्मह्यं र¬धय¬मो अहं द्विषते रधम्‌ ॥ ऋ 1-50-13

उदय होते सूर्य के द्वारा विश्व को साहस सामर्थ्य प्रदा¬न कर के , धर्माचरण पर ¬न चलने वालों के शत्रु रूपी रोगों को नष्ट करके,आ¬नन्द के साधन प्राप्त होते हैं ।

इसी विषय पर अथर्व वेद में निम्न मन्त्र मिलते हैं।

अ¬नु सूर्यमुदयतां हृदद्योतो हरिमा च ते।
गो रोहितस्य वर्णे¬न ते¬न स्वा परि दध्मसि ॥ अ 1-22-1

हृदय में उत्पन्न हरणशील व्याधि का उदय होते सूर्य से तथा हिरण्य वर्णा (Golden colored ) गौ दुग्ध के सेव¬न से उपचार करो।
गौएं दो प्रकार की मा¬नी जाती हैं अधिक दूध देने वाली तथा दूध और खेती में दोनो मे उपयोगी पाइ जाने वाली.
( Milk breeds and Dual purpose breeds.) सनहरे रंग की हिरण्य वर्णा गौ लाल सिंधी,साहीवाल, गीर इत्यादि अधिक दूध देनो वाली पाइ जाती हैं। इन्ही के दूध का हृदय रोग में महत्व बताया गया है ।

परि त्वा रोहितैर्वणै दीर्घायुत्वाय दध्मसि ।
यथाऽयरपा असदधो अहरितो भुवत्‌ ॥ अ 1-22-2

लाल रंग से तुझे दीर्घायु प्राप्त हो। जो रोगों के हरण से प्राप्त होती है॥

या रोहिणीदेवत्याय गावो या उत रोहिणीः।
रूपं रूपं वयो-वयस्ताभिष्ट्‌वा परि दध्मसि॥ अ-1-22-3

उदय होते हुए सूर्य और गौ की लालिमा रूप और आयु की वृद्धि के लिए देवता प्रदा¬नकरते हैं ।

हृदय स्वास्थ्य यज्ञ ऋग्विधान के अनुसार
ऋग्वेद सूक्त 1-43 के 9 मन्त्रों सें
अपने स्वास्थ्य लाभ के हेतु आहार, व्यवहार, उपचार के साथ परमेश्वर स्तुति व्यक्तिगत ,सामाजिक मानसिकता और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए इस यज्ञ को भी सम्पन्न करना हित कर होगा।

ऋषि कण्वो घोरः, देवता रुद्गः , मित्रावरुणौ, सोमः च
(इस यज्ञ का विधा¬न रोग निवृत्ति हेतु म¬नुष्यों, गौओं अश्वों इत्यादि के लिये किया जाता है। गोशाला में किये गए इस यज्ञ को शूल्गवां यज्ञ कहते हैं।)

कद रुद्गाय प्रचेतसे मीळ्‌हुष्टमाय तव्यसे ।
वोचेम शंतमं हृदे ॥ ऋ 1-43-1
यथा नो अदितिः करत्‌ पश्वे नृभ्यो यथा गवे ।
यथा तोकाय रुद्गियम्‌ ॥ ऋ 1-43-2
यथा नो मित्रा वरुणो यथा रुद्गिश्चिकेतति ।
यथा विश्वे सजोषसः ॥ ऋ 1-43-3
गाथपतिं मेधपतिं रुद्गं जलाषभेषजम्‌ ।
तच्छंयोः सुम्नीमहे ॥ ऋ 1-43-4
यः शुक्र इव सूर्यो हिरण्यमिव रोचते ।
श्रेष्ठो देवानां वसुः ॥ ऋ 1-43-5
शं नः करत्यर्वर्ते सुगं मेषाय मेष्ये ।
नृभ्यो नारिभ्यो गवे ॥ ऋ 1-43-6
अस्मे सोम श्रिय मधि नि धेहि श्तस्य नृणाम्‌ ।
महि श्रवस्तुविनृम्णम्‌ ॥ ऋ 1 -43-7
मा नः सोमपरिबाधो मारातयो जुहुरन्त ।
आ न इन्द्गो वाजे भज ॥ ऋ 1-43-8
यास्ते प्रजा अमृतस्य परस्मिन्‌ धामन्नृतस्य ।
मूर्धा नाभा सोम वेन आभूपन्तीः सोम वेदः ॥ ऋ 1-43-9

ॐ...atyantaadarneey subodh

ॐ...atyantaadarneey subodh ji ki jai ho ! Tathaakathit puraanon me yah bhraanti milti hai ki AAYYURVED ka praadurbhaav tathaakathit SAMUDRA MANTHAN se hua. AARYYa subodh ji ne yah siddh kar diya ki AAYYURVED KI KHOJ VEDON SE HI HUI HAI. Is tathya par bhi vishwaas prabal hota hai ki VED SABHI SATYa VIDYAAON KI JANaNI HAI ॐ...