Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

धर्म की परिभाषा

What is DHARMA ?

Atharva Veda 5-16, 'सृजारसोऽसि' अथर्व वेद 5-16 के पहले 10 मंत्रों की ध्रुव पंक्ति है ।
बल उत्पन्न कर अन्यथा निःसार रह जावेगा
Cultivate the virtue to gather strength, otherwise you will suffer deprivation

यद्येकवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥ अथर्व 5-16-1
यदि द्विवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-2
यदित्रिवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-3
यदि चतुर्वृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-4
यदि पञ्चवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-5
यदि षड्‌वृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-6
यदि सप्तवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-7
यद्यष्टवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-8
यदि नवष्टषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-9
यदि दशवृषोऽसि सृजारसोऽसि ॥अथर्व 5-16-10
यद्येकादशोऽसि सोऽपोदकोऽसि ॥अथर्व 5-16-11

वेद के अनुसार यदि तू धर्म के एक अंग से युक्त है तो उस से बल प्राप्त कर अन्यथा निः सार रह जावेगा । तब अपने में धर्म के दूसरे अंग को ग्रहण कर। यदि तू धर्म के दसों अंगों से युक्त हो चुका है फिर भी प्रभु भक्ति का अपने में सृजन कर। तभी तेरा जीवन सफ़ल होगा।

(धर्म के दस अंग क्या हैं ?)
मनुस्मृति के अनुसार वृषो हि भगवान्‌ धर्मः।
धर्म वही है जो सुख की ऐश्वर्य की वर्षा करता है।
वृषो हि भगवान्धर्मस्य यः कुरुते ह्यलम्‌ ।
वृषलं तं विदुर्देवास्तस्माद्धर्मं न लोपयेतऽ ॥ मनु 8-16
" जो सुख की वृद्धि करने हारा, सब ऐश्वर्य का दाता धर्म है, उस का जो लोप करता है, उस को विद्वान्‌ लोग वृषल समझते हैं। दयानन्द सं वि-1-5

धर्म लक्षणम्‌ - Creative Duties
सकारात्मक आचरण -Positive actions
धर्मो मनुष्याः। Humanity itself is Dharma.
धर्मो वा अधिपतिः । That which governs a Human is his Dharma

" धृति क्षमा दमोऽस्तेय शौचमिन्द्गिय निग्रहः।
धी विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षणम्‌ ॥" मनुः 6-92
धैर्य,क्षमा,असत्प्रवृत्तियों का दमन, चोरी छल कपट त्याग, मन वाणी शरीर की पवित्रता,इन्द्गिय निग्रह, ज्ञानार्जन, सत्यपालन, क्रोध त्याग, ये दश लक्षण धर्म के बताये जाते हैं।)

There are ten attributes of Dharma viz:
1.धृतिः- Forbearance, Sobriety, Resoluteness
2.क्षमाः- Forgiveness- covering a wider range of meanings
such as Amnesty, Charity, Clemency, Mercy, Non
violence
3.दमोः- Suppression of unbecoming tendencies
4.अस्तेयं :- To avoid Stealing, Deceit, Dishonesty, Blackmail, Scam
5.शौच :- Purification- cleanliness, internal & external 6. इन्द्गियनिग्रहः :- Control over desires
7. धी :- Cultivation of right mentality by expanding
intellect & avoiding negative influences
8.विद्या :- Knowledge, about every thing in this world and
beyond
9.सत्यम्‌ :- Truthfulness
10.अक्रोधो :- Avoiding Anger, Hatred, Unhappiness to
Cultivate calmness, happiness
These ten are the attributes of DHARMA

दश आजीविकायें
" विद्या शिल्पं भृतिः सेवाः गोरक्ष्यं विपणिः कृषिः।
धृतिर्भैक्ष्यं कुसीदं च दश जीवनहेतवः ॥ मनुः 10-116
सप्त मर्यादा

सप्त मर्यादाःकवस्ततक्षुस्तासामिदेकामभ्यं हुरो गात्‌।
आयोर्हस्कम्भ उपमस्य नीडे पथां विसर्गे ध्रुणेषु तस्थौ ॥ अथर्व 5-1-6
सात मर्यादाएं 1। चोरी,2ऽगम्यागमन,3।ब्रह्म हत्या, 4भ्रूण हत्या,5।मद्यपान,6।पुनः पुनः पाप कर्म में प्रवृत्ति,7।पाप कर के झूठ बोलना

ॐ...dhanyavaad dev! Bahut

ॐ...dhanyavaad dev! Bahut Jyaan praapt hua.