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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

kya ROOGN(Beemaar) VYAKTI MANSAAHAAR KAR SAKTE HAIN?

Aum....... VIDVAAN KRIPYA YAH BATAIYE KI JAB KOI VYAKTI AISE ROG SE PEEDIT HO GAYA HO JISKE UPCHAAR HETU MAANSAAHAR KA SEVAN KARNE KO KAHA GAYA HO TO KYA MAANSAAHAR KARNA UCHIT HAI? Maine padha hai ki AAYURVED AISI PARISTHITIYON ME ROGI KO MAANSAAHAR KI ANUMATI DE DETA HAI !

प्रिय

प्रिय आर्य
किसी अन्यत्र की हिंसा कर यदि आप अपना जीवन बचाना श्रेष्‍ठ समझते हैं तो आप सब कुछ कर सकते हैं अन्यथा इसको मानने का और कोई भी कारण नहीं हो सकता है | मांसाहार गलत वृत्तियों का जनक होने से पूर्णतया निषिद्ध है | माँसाहार कैसे वह कार्य कर सकता है जो वनस्पत्तियाँ नहीं कर सकती हैं ? यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न‌ है | इसे माँस के पक्षधर कैसे समझा सकते हैं ? माँस का जनक वनस्पतियाँ ही हैं व दुनिया में सब प्रकार की वनस्पतियाँ उपलब्ध हैं , फिर प्राणों से बढ़कर कोई औषधी नहीं है, अतः मांसाहार आवश्यक है यह कहना एक भ्रम, अविद्या व अज्ञान का सूचक है | गेहूँ के ज्वारे, गिलोय आदि आदि उत्तम औषधियां सर्वत्र सुलभ होने पर भी जो उलटे रास्ते चल कर ही मञ्जिल को पाना चाहें उन्हें क्या समझाया जा सकता है ?

ॐ...सत्य है!!

ॐ...सत्य है!!