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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्य समाज की वर्तमान स्थिति: Arya Samaj - where it stands?

आर्य समाज की वर्तमान स्थिति अति चिंतनीय है |

सार्वदेशिक सभा को आर्य समाज का सर्वोच्च संगठन माना जाता है, मगर यही सभा सदैव विवादों में ग्रस्त रहती है | विवादों से मुक्त हो ही नहीं पाती ! न जाने कितने ही दीर्घ काल से यह विवादों से ग्रस्त है | एक के बाद दूसरा विवाद पैदा करती ही रहती है | पता नहीं इसके नेतृत्व में क्या रखा है ? लोग स्वेच्छा से सत्ता छोड़ना ही नहीं चाहते !

देश में आजकल बहुत कुछ घटित हो रहा है - सामाजिक, धार्मिक एवं राजनैतिक सभी क्षेत्रों में, मगर आर्य समाज की इस सर्वोच्च सभा का कहीं पर भी कोई जिक्र तक नहीं होता | मानो कि उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है | ऐसी सभा का तो होना - न होना एक ही बात है |

दुर्भाग्य से आजकल स्वामी अग्निवेश जी के प्रभाव में इस सभा की प्रतिष्ठा निम्न स्तर पर जा पहुंची है | कई बड़ी बड़ी क्रान्तिकारी घोषणाएँ की गई, ऐसा कर देंगे, ऐसा किया जायेगा, इसका प्रकाशन किया जायेगा, देशव्यापी आन्दोलन होगा, आदि आदि, मगर सदा की भांति आज पर्यंत उनमे से कुछ भी नहीं किया गया |

आर्य समाज में सर्वत्र उदासीनता का साम्राज्य है | विद्वान् लोगों ने भी आशा छोड़ दी है | चंबा वाले स्वामी सुमेधानंद जी तथा प्रभात आश्रम वाले स्वामी विवेकानंद जी जैसे कुछ वृद्ध लोग हैं, जो स्वामी अग्निवेश जी के समर्थक माने जाते हैं, मगर उन लोगो की एकता की तथाकथित अपीलें भी निरर्थक ही रही हैं | किसी को भी उन अपीलों में सच्चाई या आर्य समाज की वास्तविक हित-चिंता दिखलाई नहीं पड़ती है | इसलिए कोई भी नए प्रसिद्ध आर्य विद्वान् या कार्यकर्ता उनको समर्थन देने के लिए तैयार नहीं | एकता के दर्शन कहीं पर भी नजर नहीं आते |

स्वामी प्रणवानंदजी, श्री सोमदेव जी शास्त्री जैसे कुछ लोग सभी गुटों के द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में दिखलाई पड़ते हैं, मगर उनका सहयोग वास्तव में किसको है यह हमें पता नहीं |

प्रतीत होता है की दिल्ही में अब कोई ऐसा प्रभावशाली विद्वान् आर्य नेता आजकल है ही नहीं, जो सभा को सशक्त नेतृत्व प्रदान कर सकने में समर्थ हो |

जिस आदमी का स्वयं का स्वास्थ्य ठीक नहीं हो, सतत बीमार रहता हो, या जिसको अपने व्यवसाय, सेवा या गृहस्थ सम्बन्धी कार्यों से अवकाश मिलता न हो, जिसने अनापसनाप बककर अपना व्यक्तित्व को अत्यंत ही संदेहास्पद या बेलगाम-सा बना लिया हो, ऐसे व्यक्तियों को सभा-संगठन का कार्य कभी नहीं देना चाहिए | ऐसे लोग सभा से दूर रहें यही समाज के लिए उनकी सेवा है |

सामान्य आर्यों के लिए सभा-संगठन की स्थिति अब तो असह्य हो गई है | कोई आगे आकर इस समस्या को सुलजावें तो अच्छा है | अगर परिस्थिति को शीघ्र संभाला नहीं गया तो आर्य समाज बिखर जायेगा और ऋषि दयानंद का यह मिशन इतिहास की वस्तु बन कर रह जाएगा | अपनी अपनी संस्था, अपने अपने गुरुकुल, अपने अपने आश्रम, अपने अपने ग्रन्थ-लेखन, अपने अपने प्रचार कार्य आदि की चिंता करते रहने में कहीं आर्य समाज का संगठन ही विलुप्त न हो जाए |

= भावेश मेरजा

ॐ...pranaam bhavesh ji. Ye

ॐ...pranaam bhavesh ji. Ye nishchit roop se chinta ka vishay hai.

every task has a time after

every task has a time after its fulfilment it becomes vanish. The same will be happen with Arya samaj if it is the Niyathi then no one can change it. But Mahrishi said that dont be run away from self work. Do Purusharth,face it and try to re built it , its time of change

Believe it that neither arya destroyed nor never Arya Samaj will destroy.It has a power of Parmatma and of satya as it has in Vedas.

Dont worry but try to re make it Task is difficult but not impossible.

Best wishes

Vikramaditya

प्रिय

प्रिय विक्र्मादित्य जी
नमस्ते
आपका उत्साह व विश्‍वास बहुत प्रेरक है
आनन्द‌

Sh.Anand Bakshi ji,

Sh.Anand Bakshi ji, Namaste
I have full confident that Arya Samaj will survive as its objective is related to Total Truth.Active members should be inducted in sabha and take up agenda to carry forward the mission of Maharishi Dayanand .
AUM
Ramesh