Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

प्रेरक वेद-वाक्य‌

वेद शब्दार्थ भाष्यम् - डा. कृष्ण नारायण पाण्डेय
ऋग्वेद : मनुर्भ‌व - आदमी बनो

1. एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति | (1|164|46) एकेश्‍वर को विद्वान लोग अनेक प्रकार से पुकारते हैं |
2. स्वस्ति पन्थामनुचरेम | (5|51|15) कल्याण मार्ग का अनुसरण करें |
3. विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव | यद् भद्रं तन्न आसुव | (5|85|5) विश्व देव सविता बुराइयां दूर करावें जो कल्याणकारी है, वह प्रदान करें |
4. उप सर्प मातरं भूमिम् | (10|18|10) सेवा करें मातृ भूमि की |
5. सं गच्छध्वम् सं वदध्वम् | (10|181|2) साथ चलें मिलकर बोलें |

यजुर्वेद : सुमना भव | अच्छे मन वाले बनें

6. ऋतस्य पथा प्रेत | (7|45) धर्म के मार्ग पर चलें |
7. भद्रं कर्णेभिः श्रृणुयाम | (25|11) मंगलकारी वचन कानों से सुनें |
8. तन्मे मनः शिव संकल्पमस्तु | (34|1) यह मेरा मन शिव संकल्प युक्त हो |
9. मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे | (36|18) मित्र की दृष्‍टि से सर्वत्र देखें |
10. मा गृधा कस्य स्विद धनम् | (40|1) मत लालच करें किसी अन्य के धन का |

सामवेद : सरस्वन्तम् हवामहे | परमेश्‍वर का आवाहन है

11. अध्व‌रे सत्य धर्माणं कविम् अग्निम् उप स्तुहि | (32) यज्ञ में सत्य धर्मरत कवि अग्नि की स्तुति करें |
12. ऋचा वरेण्यम् अवः यामि | (48) वेद मंत्रों से श्रेष्‍ठ रक्षण मांगता हूँ |
13. मंत्र श्रुत्यं चरामसि | (176) मंत्र श्रुति का हम पालन करते हैं |
14. जीवा ज्योति रशीमहि | (259) सभी जीव परमप्रकाश को प्राप्त करें |
15. यज्ञस्य ज्योतिः प्रियं मधु पवते | (15) यज्ञ की ज्योति प्रिय मधुर भाव उत्पन्न करती है |

अथर्ववेद : मानवो मानवम् पातु - मनुष्य मनुष्य को पाले |

16. माता भूमिः पुत्रोSहम् पृथिव्याः | माता भूमि है, पुत्र है हम पृथ्वी के |
17. यज्ञो विश्‍वस्य भुवनस्य नाभिः | (9|10|14) यज्ञ कार्यक्रम विश्‍व भुवन का केन्द्र है |
18. ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत | (11|5|19) ब्रह्मचर्य के तप से देवों ने मृत्यु पर विजय प्राप्त की |
19. मधुमतीं वाचमुदेयम | (16|2|2) मैं मीठी वाणी बोलूँ |
20. सर्वमेव शमस्तु नः | (19|9|14) सभी शान्तिप्रद हो हमारा |

ॐ..VIBHINN VARNON KA

ॐ..VIBHINN VARNON KA PRAYOG KARNE KE KARAN IS 'ARTICLE' Mein ek vishesh aakarshan hai. MANTR KRAMAANK 8 ke arth Main shanka utpann ho rahi hai. 'SHIV-SANKALP' kya hai? Kya iska arth 'AATMA-SANKALP' hai? Shiv=aatma?ॐ...

शिव

शिव सङ्कल्प के छह मन्त्र आपने पढ़े होंगे ?
परमात्मा से यह प्रार्थना की गयी है कि मेरा मन जो अनेक गुणों से युक्त है वह शुभ सङ्कल्प वाला हो | इस शरीर का सारा कार्य मन के ऊपर आधारित है | यदि मन में सङ्कल्प अच्छे नहीं होंगे तो हमारे द्वारा किये गये कार्य भी अच्छे नहीं होंगे |मन में अच्छे अच्छे सङ्कल्प डालना ही हमारा ध्येय होना चाहिए | बिना दृढ़ सङ्कल्प के हम कोई महान कार्य्य नहीं कर सकते हैं |मन बुद्धि चित्त प्राण से जो भी कार्य्य आत्मा चाहे ले सकता है | आत्म सङ्कल्प ही मन के शिव सङ्क‌ल्पों का आधार बनता है | यदि आत्म जागृति नहीं है तो मन में शिव सङ्क‌ल्प कौन भरेगा ?

ॐ...satya hai! Aur Mujhe

ॐ...satya hai! Aur Mujhe shiv sankalp ke mantron ka bodh nahi hai.