Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ब्रह्मच्रर्य

जो बंधु आजकल टीवी पर खान पान के स्वास्थ्य के बारे में विज्ञापन ध्यान से देखते होंगे उन्हे दो नयी वस्तुओं से लुभाने का प्रयास दिखायी देगा. पहली है ओमेगा 3 और दूसरी है डी एच ए. Omega3 and DHA. आप के और आप की संतान के मस्तिष्क के लिए, स्वास्थ्य के लिए , त्वचा के लिए, यौवन के लिए , नेत्र शक्ति के लिए हर पेय मे खाद्य पदार्थ मे, सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुऑं मे आप को इन दो तत्वों का प्रचार मिलेगा. यह विज्ञान की खोज अत्यंत आधुनिक है. परंतु क्या आप जानना चाहेंगे कि यह हमारी वैदिक सभ्यता मे आदि काल से हमारी संस्कृति के वेद मंत्रों मे उपलब्ध रही है.
डी एच ए एक वसा तत्व है जो हमारे आहार मे उपलब्ध ओमेगा थ्री वसा से बनता है. आधुनिक विज्ञान को ओमेगा थ्री का महत्व लगभग पांच वर्ष से ही आने लगा है. The fats in our diet are classified mainly in two categories. Saturated Fats and Unsaturated Fats. Unsaturated fats consist of basically two types Omega3 and Omega6. ओमेगा3 से हमारे शरीर मे पाचन क्रिया द्वारा डी एच ए वसा बनता है . मानव मस्तिष्क की संरचना मे मुख्यत: डी एच ए ही पाया जाता है. ओमेगा3 से ही आधुनिक विज्ञान के अनुसार एक और महत्वपूर्ण तत्व बनता है जिसे Prostagandin कहा जाता है.यही वीर्य तत्व भी होता है. अब विज्ञान यह भी मानने लगा है कि Semen भी डी एच ए से बना होता है.
आर्य बंधु ध्यान देंगे कि मस्तिष्क को वीर्य से बना होना अब विज्ञान मानता है परंतु अभी ऊर्ध्वरेता विषय आधुनिक विज्ञान की सोच से दूर है. यही उपदेश तो वेद मंत्र तच्च्क्षुर्देव हितं शुक्रमुच्चरित कह कर नेत्र शक्ति को शुक्र को ऊध्वरेता बना कर हमारे नेत्रों से आरम्भ कर के शरीर के सब अंगों को जीवेम शरद: शतम,अदीनास्याम शरद:शतम का ज्ञान दे रहा है.
बात आती है कि ओमेगा 3 कहां से प्राप्त होता है. आधुनिक विज्ञान के अनुसार मुख्यत: ओमेगा3 केवल हरे चारे पर पोषित गाय के दूध मे और मछली के तैल मे होता है. इसी लिए तो हमारे यहां गोदुग्ध को अमृत वीर्य वर्धक कहा गया
बाह्य प्राणायाम मुख्य रूप से , कपाल भांति, अश्विनी क्रिया इत्यादि सब ऊर्ध्वरेता बनाते हैं.
महिलाओं पर ध्यान दें तो रजोदर्शन और मासिक दोनो डी एच ए से बने बताये जाते हैं. गर्भ धारण करने की क्षमता भी शरीर मे प्रर्याप्त डी एच ए उपलब्ध होने पर निर्भर रहती है. अस्थि दोर्बल्य भी आहार मे ओमेगा3 की कमी से होता है. स्वच्छ गोदुग्ध का आहार मे यही प्राचीन महत्व था.
यदि ब्रह्मचर्य के मह्त्व को ऊर्ध्वरेता, डी एच ए के साथ जोड कर देखा जाए और युवाओं को समझाया जाए तो भारतीय सोच और संस्कृति का वैज्ञानिक मह्त्व एक आधुनिक्तम विज्ञान सम्मत विषय बन कर समाज के सामने आएगा.

आदरणीय

आदरणीय सुबोध जी
नमस्ते एवं हार्दिक धन्यवाद !
अतयन्त संक्षेप में अत्यन्त म‌हत्त्वपूर्ण बात आपने बता दी है | गाय का दूध और ब्रह्मचर्य हमारी जीवनचर्या के कभी अभिन्न अंग थे | इन दोनों को ही कितनी सफाई से हमसे दूर कर दिया गया है, और‌ यह सोच पाना भी आज के भारतीय के लिये असम्भव सा हो गया है कि यह सब कितना आवश्यक था और है |
ब्रह्मचर्य और प्राणायाम‌ जहां वीर्य को नष्ट होने से बचाकर उसे मस्तिष्क तक ले जाता है, जिससे बुद्धि का अतुल विकास होता है, वहीं पर गौदुग्धामृत हमें उस खजाने से भर देता है | कहीं दूसरे लेख में आपने बताया था कि आजकल जो विदेशी नस्ल की गाएं हमारे यहाँ लायी गयी हैं उनके दूध में ओमेगा 3 न होकर ओमेगा4 होता है जो कि शायद हानिकर है ?
इस प्रकार हमारे राष्ट्र का पतन बहुत ही सोच समझ कर किया जा रहा है, हमें हमारी सभी सांस्कृतिक विरासत से अलग थलग करके | किसलिए ?? केवल व्यापारिक लाभों के लिए | आपने यह भी कहीं बताया था कि यह ओमेगा 3 किस प्रकार कृत्रिम तरीके से बनाया जाता है , शायद गायों का वध करके उनकी खाल से ?

आशा है आप इस पर और प्रकाश अवश्य डालने का कष्ट करेंगे तथा पाठक गण भी इसे पड़ कर‌, इन विचारों का प्रचार‌ व प्रसार करेंगे |

आनन्द‌

namaste subodh kumar ji,

namaste subodh kumar ji,
i am new to this wesite though i am very keen to about arya samaj. i want to know that is salt harmful in kepping brahcharya? dhanyawaad