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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

SAKARATMAK DRISHTIKON

ओ3म्
सकारात्मक दृष्टिकोण
सुधा सावंत, एम ए, बी एड

कुछ भी बन - बस कायर मत बन।
ठोकर मार, पटक मत माथा, तेरी राह रोकते पाहन।।
यह कविता हमें सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की प्रेरणा देती है।हमारे मार्ग में बाधाएं तो हमेशा आती हैं पर हमें अपना सकारात्मक विचार नहीं छोड़ना चाहिये। कविता मन में जोश पैदा करती है। काम तो सभी करते हैं पर सोच अलग अलग होती है। एक कहानी है, किसी गांव में कोई यज्ञशाला बन रही थी। कई मजदूर काम कर रहे थे । पत्त्थर तोड़ रहे थे। एक पथिक उस मार्ग से जा रहा था उसने पूछा - क्या कर रहे हो भाई ? क्या बना रहे हो ? मजदूर गुस्से में था। बोला देख नहीं रहे हो,पत्थर तोड़ रहा हूं। कोई काम नहीं मिला ।घर तो चलाना है, बच्चे हैं, पत्नी है परिवार का पेट तो भरना है। सो तोड़ रहा हूं पत्थर। पथिक ने सोचा यह जरा गुस्से में है, दूसरे से पूछता हूं। उसने दूसरे मजदूर से पूछा क्या कर रहे हो भाई, दूसरे ने भी निराश स्वर में कहा, भाई पत्थर तोड़ रहा हूं गांव में नया आया हूं कोई और काम नहीं मिला।पैसा तो कमाना है। पथिक को लगा ये भी मजबूरी में काम कर रहा है।
उन्होने एक बार फिर वही प्रश्न तीसरे मज़दूर के सामने दोहराया। वह कुछ भजन भी गा रहा था, बड़े उत्साह से बोला, अरे आपको नही पता, हमारे गांव में एक यज्ञशाला का निर्माण हो रहा है, प्रतिदिन हवन होगा, ईश्वर की कृपा होगी । हमें भी उनका आशीर्वाद मिलेगा। थोड़ा बहुत पैसा भी मिल जाता है सो घर का खर्चा उससे चल जाता है। पथिक उत्तर सुन कर संतुष्ट हुआ ।
यह घटना मैं अक्सर विद्यार्थियो को सुनाती हूं और पूछती हूं कि किस मज़दूर का उत्तर उन्हें अच्छा लगा तो सभी कहते हैं कि तीसरे मज़दूर का। आपको भी ऐसा ही लगा होगा। यही है सकारात्मक दृष्टिकोण। वास्तव में काम तो सभी करते हैं परंतु जो काम करते हुए आनंद का भी अनुभव करते हैं उसे बोझ समझकर नही करते वे स्वंय भी प्रसन्न रहते हैं, जीवन में सफल रहते हैं और दूसरो को भी प्रसन्नता प्रदान करते हैं। यही सकारात्मक दृष्टिकोण हमारी सफलता की पहली सीढ़ी है ।
हम कैसे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं आईए विचार करें।
1. हमारे जीवन को संतुलित रूप से चलाने, सुचारु रुप से चलाने का प्रथम उपाय है – हम लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर संभव उपाय करें। उसे हर रूप से परखें। विद्यार्थियों के लिए विद्या अध्ययन ही प्रथम कर्तव्य है और व्यवसाय अपनाना उनका लक्ष्य है। लक्ष्य को हर परिस्थिति मे प्राप्त करने का प्रयत्न करें।
2. मार्ग की बाधाओ से निराश न हों। कठिनाईंया तो हर काम मे आती हैं। यही कठिनाईंया हमारी शक्ति को बढ़ाती हैं। आप अक्सर पहाड़ो पर देखते होंगे कि वहां के लोग पहाड़ पर सामान लेकर भी जल्दी चल पाते हैं। हम यात्री उतनी जल्दी नही चल पाते। कारण स्पष्ट है। पहाड़ के उबड़ खाबड़, ऊंचे नीचे रास्तो नें और लगातार अभ्यास ने उनकी शारीरिक शक्ति को बढ़ा दिया है। इसी तरह काम करते समय कठिनाई हमारे संकल्प को और अधिक दृढ़ बनाएंगी। हम अधिक परिश्रम से, अधिक मनोयोग से काम करेंगे ताकि अंत में हमे सफलता मिले।
3. ध्यान की एकाग्रता के लिए हमे प्राणायाम, व्यायाम और संतुलित भोजन करना चाहिए। अधिक काम की वजह से कई बार हम समय पर भोजन नही करते। या जल्दी जल्दी मे कर लेते हैं। ऐसा न करें। आप जानते हैं कि काम चाहे जितना ज़रूरी हो – पेट्रोल न डालें तो कार नही चलेगी। हमारा शरीर भी वैसा ही साधन है जिसे समय पर संतुलित भोजन की आवश्यकता है।
4. समय प्रबंधन की सफलता के लिए आवश्यक है कि हम समय तालिका बना कर काम करें। कभी बहुत काम किया तो कभी कुछ नही – ऐसा न करें। और लगातार प्रयत्न करना चाहिए कि निर्धारित समय में काम पूरा हो जाए।
5. अपने मनोभावों के संतुलित एवं संयमित रखें। धर्म युद्ध के लिए अर्जुन को प्रेरित करते हुए योगेश्वर श्री कृष्ण ने यही कहा था कि दुख या सुख में अपने को बहुत दुखी या सुखी मत करो। इन विचारो से अपने को ऊपर रखो । साथ ही क्रोध को पास भी मत फटकने दो। क्रोध मे बुद्धि का, विवेक शक्ति का नाश हो जाता है और उसके बाद तो पूर्ण विनाश ही हो जाता है। धैर्य और विवेक के साथ परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करो।
6. रात को विश्राम करने से पूर्व अपने दिन भर के काम पर एक बार विचार अवश्य करो। कहां क्या कमी रह गयी है उस पर् ध्यान दो और प्रयत्न करो कि अगले दिन उसे पूरा कर दो ताकि काम ठीक से आगे बढ़ता रहे।
7. सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए स्वाध्याय भी बहुत ज़रूरी है। महान लोगो के जीवन के विषय मे पढ़ें। हमे पता चलेगा कि सभी व्यक्ति कठिनाइयों और बाधाओं को पार करते हुए ही आगे बढ़ें हैं। लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन इसका ज्वलंत उदाहरण है। उनका बचपन गरीबी मे बीता। मुश्किल से पढ़ाई की। नदी पार करने के लिए नाविक को देने के लिए पैसा नही होता था। तो गंगा नदी तैर कर पार करते थे। कपड़े और किताबे अपने मित्रो को दे देते थे कि वो उन्हे उस पार दे सकें। स्वतंत्रता संग्राम और असहयोग आंदोलन में गांधी जी का साथ दिया। स्वतंत्र भारत में जवाहर लाल नेहरु के बाद देश के प्रधानमंत्री बने और 1965 के भारत पाक युद्ध में न सिर्फ जय जवान-जय किसान का नारा दिया बल्कि जीत भी दिलाई।

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए इस वेदमंत्र का अर्थ समझते हुए प्रतिदिन पाठ करें। मंत्र इस प्रकार है
तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत। पश्येम शरद: शतम्
जीवेम शरद: शतम् शृणुयाम शरद: शतम् प्रब्रवाम शरद: शतमदीना: स्याम शरद: शतम्
भूयश्च शरद: शतात्।।

मंत्र का अर्थ है कि सर्वज्ञ ईश्वर ने हमें प्रकाशित करने वाली, कल्याणकारी दिव्य शक्तियां ज्ञानेंद्रियां कर्मेंद्रियां, मन बुद्धि पहले ही बीच रूप में प्रदान कर दीं हैं। हमें उनका ठीक से उपयोग करना चाहिए। ठीक से विकसित करना चाहिए और सौ वर्ष तक ज्ञान प्राप्त करते हुए जीने की इच्छा करनी चाहिए। सौ वर्ष तक वेद आदि का ज्ञान सुनना चाहिए। उस ज्ञान को बोल कर उसका प्रचार प्रसार करना चाहिए और दीनता का भाव मन मे लाए बिना ही जीवन बिताना चाहिए। पूर्ण जीवन के लिए आवश्यक है सुनना और सुनाना । इसी से संस्कृति जीवित रहती है। हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वो अपनी उन्नति से संतुष्ट न रह कर सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझें।
आप यह मान कर चलें कि आपमें वे सभी योग्यताएं हैं जो किसी भी सफल व्यक्ति में हो सकती हैं। ईश्वर ने आपको सभी योग्यताओं से युक्त ज्ञानेंद्रियां और कर्मेंद्रियां दी हैं। मन, बुद्धि और विवेक दिया है। इनसे काम लें और जीवन को सफल बनाएं।
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सुधा सावंत, एम ए, बी एड
उपवन
609, सेक्टर 29
नोएडा - 201 303. भारत
sanskrit.sudha@gmail.com

आदरणीया

आदरणीया माता सुधा जी
नमस्ते
यह भी आपका लेख बालकों व युवाओं को सही राह पकड़ने में निश्‍चय ही अत्यन्त सहायक होगा | एक बात जो अधिकतर अभावों में रहे व्यक्तियो, युवाओं में घर कर जाती है , वह है नकारात्मक सोच | अपने प्रति अविश्‍वास | क्या इसमें आत्म ज्ञान की प्रतीति लाभदायक रहेगी | यदि रहेगी तो प्राणायाम के अलावा इसे किस प्रकार अथवा किन वेद मन्त्रों के जप मनन आदि से प्राप्त किया जा सकता है ? आषा है आप इस विषय पर भी किसी लेख में कुछ और प्रकाश आवश्‍य डालेंगी |

अतीव धन्यवाद सहित
आनन्द‌

AUM Aadarniy Anand Bakshi

AUM
Aadarniy Anand Bakshi Ji, Namaste.
At this point of time my husband, Brigadier Chitranjan Sawant,VSM and I are in Dehra Dun attending the UTSAV of the Dronsthali Aarsh Kanya Gurukul. The point raised by you is appreciated and has been taken note of.
On return to Noida after a week, I shall definitely write another article dwelling on the new points.
Thanks indeed for reading my article and commenting on it.
Sudha Sawant
27.5.10

बहुत बहुत

बहुत बहुत धन्यवाद | आपकी देहरादून 'द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल' की यात्रा सभी बालिकाओं के लिए अत्यन्त लाभकारी हो एवम् आपको एवं आदरणीय सावंत जी को भी इससे सम्पूर्ण‌ सन्तोष एवं आनन्द का अनुभव हो, ऐसी शुभकामनाओं सहित
आनन्द‌

नमस्ते

नमस्ते ,
बहुत अच्छी उदहारण देकर आपने इसे समझाया |
धन्यवाद |
विभा