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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

जीव के लिए सारा संसार‌

ओउम् !
तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सोम तस्थिरे |
तुभ्यमर्षन्ति सिन्धव:||
ऋग्वेद 9.62.27

शब्दार्थ:
हे कवे = क्रान्तदर्शनसमर्थ , छिपी वस्तुओं के देखने की शक्ति वाले
सोम= शान्ति के अभिलाषी जीव
इमा = यह
भुवना = भुवन, लोक
महिम्ने = महिमा के कारण
तुभ्यम् = तेरे लिए
तस्थिरे = ठहरे और गति करते हैं
सिन्धव: = नदी, समुद्र, बहने वाले पदार्थ
तुभ्यम् = तेरे लिए
अर्षन्ति = गति करते हैं

हे क्रान्तदर्शनसमर्थ , छिपी वस्तुओं के देखने की शक्ति वाले , शान्ति के अभिलाषी जीव यह भुवन,लोक महिमा के कारण तेरे लिए ठहरे और गति करते है |नदी, समुद्र, बहने वाले पदार्थ तेरे लिए गति करते हैं |

(स्वामी वेदानन्द् तीर्थ सरस्वती)

व्याख्या -

प्रश्न होता है , यह संसार किसके लिए है ? अत्यन्त गहन प्रश्न है | यदि कहो कि जीव के लिए, तो यह बात समझ में नहीं आती | दार्शनिक लोग बताते हैं , साथ में वेद की गवाही भी है कि जीव छोटा , परमाणु से भी सूक्ष्म है | यह सारा पसारा तुच्छ जीवों के लिए| हो नही सकता |
तो क्या सारा संसार निष्प्रयोजन है ? क्या कोई कारीगर ऐसा भी है जो कोई ऐसी वस्तु बनाए जिसका उपभोक्ता = बरतने वाला कोई न हो | बनी वस्तु जहां बनाने वाले का जहाँ पता देती है , वहाँ यह भी बताती है कि इसका उपयोग करने वाला भी कोई होना चाहिए |
वेद कहता है हे जीव! ये सारा संसार तेरे लिए है | तभी तो आत्मनिरूपण प्रसंग में वेद ने कहा है -

आ वरीवर्ति भुवनेष्वन्त: | ऋग्वेद‌ 10.177.3

जीव पुन:-पुन: इन लोकों में आता जाता है |
यदि यह जीव के लिए न हो तो इनमें इसे कौन आने दे ? ये बड़े बड़े पदार्थ हैं | इनका जीव के लिए होना जीव की बढ़ाई का द्योतक है | परिणाम में बढ़ाई बढ़ाई नहीं | हाथी का डीलडौल बड़ा है किन्तु महावत उसे छोटे से अंकुश से जिधर चाहता है , चलाता है | वेद में दूसरे स्थान पर बहुत सुन्दर शब्दों में इस भाव को व्यक्त किया है

इन्द्राय द्यावऔषधीरुतापो रयिं रक्षन्ति जीरयो वनानि| ऋग्वेद 3.51.5

जीव के लिए द्यौ लोक है | औषधियाँ और जल, वन आदि सब मिलकर जीव के लिए धन की रक्षा करती हैं | पृथिवी से लेकर जो भी जन्य पदार्थ हैं, सारे जीव के लिए हैं | यदि यह इनका सदुपयोग करेगा, तो ये इसके लिए धन = प्रीतिसाधन हैं, दुरुपयोग से यही निधन = मृत्यु साधन बन जाएँगे | सारी सृष्टि तेरे लिए है, तूं चाहे जैसे प्रयोग कर , किन्तु परिणाम का अवष्य विचार करना |