Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सत्य की और

आओ ले चलूँ तुम्हें सत्य की और
सत्य जो सबसे सुन्दर है
सत्य जो सबसे पावन है
सत्य जो सबसे निर्मल‌ है
सत्य जो सबसे सहज है

सत्य न जिसमें झूठ छिपा
सत्य न जिसमें अज्ञान छिपा
सत्य न जिसमें पाप छिपा
सत्य न जिसमें झूठ का कोई भी आधार छिपा

सत्य ब्रह्म है, सत्य जगत का कारण है
सत्य ही मैं हूँ, सत्य ही तू है
इसमें नहीं कुछ भी झूठ है
इसमें न ही भ्रम है, न ही है अज्ञान

बस भ्रम है तो, चलते फिरते जीवन में है
जो नित्य बदलता है, पल पल बदलता है
यह बदलता जीवन भी, असत्य नहीं है
असत्य है, इसको न समझना

जीवन है प्रकृति के असँख्य कणों से रचाया गया खेल
रचाने वाला भी अनन्त है, सर्वव्यापक है, सर्वशक्तिमान है
कण कण में वह ही विद्यमान है
मैं और तुम खेलते हैं सब खेल

अनन्त हैं यह खेल, अनन्त है यह सृष्टि
अनन्त अनन्त काल से यह विराजमान है
बनती है, चलती है, बिगड़ती है
फिर बन जाती है, फिर चल पड़ती है, फिर सिमट जाती है
न यह क्रम कभी शुरू हुआ, न कभी रुका, न ही कभी रुकेगा

तो यह सत्य है कितना सरल, नहीं है इसमें कुछ भी जटिल
बात अब अटकी है तो बस एक बात पर
क्या ज्ञान है और क्या अज्ञान है
जब सब है समक्ष, बुद्धि से स्पष्ट

तो क्यों पड़ते हैं हम अस्पष्ट में
क्यों कान को सीधे नहीं पकड़ते हैं
घुमा घुमा कर हाथ क्यों पकड़ते हम कान हैं

देखिये, प्रकृति के किसी कण को हिलाइये
तो यह हिलने लगता है, रोकिये तो रुक जाता है
यह मैं और तुम हैं जो इसे रोकते और चलाते हैं
जैसे मैं और तुम हैं, वैसे ही सृष्टि में है विद्यमान

एक शक्ति जो सर्वव्यापक है, सर्वशक्तिमान है
जो सब जगत को रोकती है, चलाती है
फिर समेटती है, फिर बनाती है, फिर‌ चलाती है

जैसा देखते हो इस जीवन में, वैसा ही जानो है इस ब्रह्माण्ड में
यह हमने जो पाया, यह भी तो एक लघु ब्रह्माण्ड है
जैसा यहां होता है, वैसा ही ब्रह्माण्ड में होता है
यहाँ माता पिता हैं, तो ब्रह्माण्ड का भी माता और पिता है

यहाँ पर मित्र हैं, भाई और बहन हैं
तो ब्रह्माण्ड के कर्त्ता में भी यह सब गुण विद्यमान हैं
यहाँ आचार्य हैं गुरू हैं तो भगवान भी सबका गुरु है
वह ही है गुरुओं का भी गुरू

अज्ञान है उसको न मानना, उसको न जानना
अपने को उससे न जोड़ना
बस केवल प्रकृति से चिपटना
एक तरफा यह चाल है, जो सब दुःखों की खान है

आओ‍ सुधारें फिर से अपना संतुलन
खेलें प्रकृति के खेल को, पर मित्रता करें, अपने उस परम मित्र से
और परम मित्र के द्वारा अपनी जैसी हर एक आत्मा से
यही सत्य है, यही परम सत्य है ||