Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

नियम आत्मिक शक्ति का - एक न‍ई खोज !

न्युटन पेड़ के नीचे बैठे थे, तभी एक सेब पेड़ से टूटकर नीचे आ गिरा | न्यूटन नें सोचना आरम्भ कर दिया | यह सेब पेड़ से टूट कर नीचे ही क्यों गिरा, ऊपर क्यों नहीं गया ?
सभी मनुष्य इसी प्रकार की घटना से भली प्रकार परिचित हैं, परन्तु वे कभी यह नहीं सोचते कि ऐसा क्यों हुआ | न्यूटन ने सोचा और उसका परिणाम निकला विज्ञान का एक नया नियम जिसे 'गुरुत्त्वाकर्षण का नियम' कहते है |
आइए आपको आज इसी प्रकार के एक अन्य अनुसंधान की और ले चलते हैं |
ऊपर की ही घटना को फिर ध्यान में लाईये | सेब टूटा, पेड़ के नीचे गिरा | गिरा इसलिए कि सेब को पृथ्वी ने अपनी और खीँचा |अब क्या कभी आपने सोचा कि सेब ऊपर क्यों नहीं गया | अथवा दायें बायें क्यों नहीं गया ?
अब आपको मैं एक अन्य स्थिति की और ले चलता हूँ |
बच्चे खेल रहे हैं | कभी चोट लगती है तो नीचे गिर जाते हैं | कारण वही, गुरुत्त्वाकर्षण का नियम अथवा यूँ कहिये कि पृथ्वी की गुरुत्त्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव |
अब देखिये बच्चे अचानक उठकर ऊपर उछलने लगते हैं | इसी प्रकार पशु पक्षी भी ऊपर नीचे उछलते कूदते नजर आते हैं | यह सब ऊपर क्यों उछले ? अथवा इन्होंने ऊपर उछलने की इच्छा ही क्यों की ? क्या कभी सेब ने भी ऊपर उछलने की इच्छा की ? नहीं | तो इन्होंने ऊपर उछलने की, इधर उधर उछलने, कूदने की इच्छा क्यों की ?

नहीं सोचा न | तो आज से सोचिये और बनिये नए आविष्कारक | नए सिद्धान्त अथवा नियम का नाम होगा
"नियम आत्मिक शक्ति का'
यह नियम कहता है
'इस भौतिक शरीर के भीतर एक अभौतिक वस्तु विद्यमान है जिसे आत्मा कहते हैं | वह भौतिक नियमों के अनुकूल अथवा प्रतिकूल कार्य करने व करवाने की क्षमता व इच्छा शक्ति रखती है |'
"कर्त्तुम अकर्त्तुम, अन्यथा कर्त्तुम समर्थः |'
यह है हमारे शास्त्रों की परिभाषा आत्मा के बारे में |
आत्मा वह है जो एक कार्य को एक प्रकार से करने, विपरीत प्रकार से करने, अथवा अन्य प्रकार से करने की इच्छा व सामर्थ्य रखती है | यह कोई भौतिक वस्तु नहीं जो भौतिक नियमों से संचालित हो |
तो आज से अपने आत्म ज्ञान को बढ़ाइये | यह नियम आपको अपनी आत्मिक शक्ति से परिचित करवाएगा | उसका विकास करने में आपकी सहायता करेगा | और आपको अज्ञान, अन्धविश्‍वासों व कुरीतियों से बाहर निकलने की शक्ति देगा |

ॐ....चरण

ॐ....चरण स्पर्श आर्य्य !
आपका article त्रुटिरहित नहीं है!
मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि -
(१) क्या आप यह मानते हो कि न्यूटन ने ही 'गुरुत्वाकर्षण के नियमों' की खोज की थी??!
(२) क्या आप ये भी मानते हो कि 'गति के नियम'(laws of motion)कि खोज न्यूटन ने ही की थी?!!

प्रिय

प्रिय आर्य
आपका यह सन्देह व्यक्त करना उचित प्रतीत होता है | वेद शास्त्रों में सभी सिद्धान्तों की अद्भुत् व्याख्याये विद्यमान हैं आत्मा का परमात्मा का ज्ञान विद्यमान है, फिर भी क्या आज का पश्चिमी जगत् उनसे ज्ञान लेकर उसका श्रेय उनको देता है ? नहीं देता है | सारे ज्ञान का पेटेन्ट वह अपने नाम से करवा लेता है |यदि हमारे वैज्ञानिकों ने कुछ आविष्कृत किया, तो एक तो उसका सारा इतिहास‌ अधिकतर नष्ट कर दिया गया है, दूसरा आज के माहोल में उसे कोई महत्त्व नहीं दिया जा रहा है |
यह ऊपर दिया गया उद्धाहरण इस बात को भी बतलाता है कि ज्ञान सदा से ही उपलब्ध है पर हम उसे वेदों के नाम से ग्रहण नहीं करते | जब वही ज्ञान बाहर से हमें परोसा जाता है, तब वह हमें बहुत भाता है |