Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

चकित है आज ये दुनिया

चकित है आज ये दुनिया
ये कैसी ज्योति चमकी है
धरा पर बादलों के बीच
जो पूर्व से निकली है

तड़ित बन जो चमकती है
तड़ित बन जो कड़कती है
जो पावन करती तन मन को
धरा से पाप हरती है

प्रभु के प्रेम का जग में
सदा विस्तार करती है
यह कैसी दिव्य शक्ति है
धरा पर बादलों के बीच
जो पूर्व से निकली है

कराती योग दुनिया को
बनाती योग्य दुनिया को
छुड़ाती रोग दुनिया के
भगाती दुष्‍ट दानव को

जगाती आत्म शक्ति को
बढ़ाती मन की शक्ति को
बिना कुछ मूल्य लेकर भी
दिलाती सुख जो दुनिया को

दिखाती राह दुनिया को
चलाती साथ में सब को
मिलाती भूले भटकों को
बचाती दीन दुखिया को

वह कैसी आग बन आई
जलाती हर विषाणू को
भगाए कीट सारे और
मिटाए सारे रोगों को

धरा पर स्वर्ग की राहों
का जो विस्तार करती है
यह कैसी दिव्य शक्ति है
धरा पर बादलों के बीच
जो पूर्व से निकली है ||