परमात्मा का नाम स्मरण करने का अर्थ यह है की परमात्मा के गुण, स्वभाव के अनुकूल अपने गुण, कर्म, स्वभाव को बनाते जाना ही परमात्मा का नाम स्मरण है और परमात्मा की भक्ति का स्वरूप यह है की अधर्म कभी नहीं करें | परमात्मा सब सुखों को को देने वाला है | परमात्मा का सुख उसे मिलता है जो परमात्मा की आज्ञाओं का पालन करता है | परमात्मा का सच्चा प्रेमी सज्जनों से घृणा नहीं करता है | वह छोटे-बड़े की भावना को त्याग देता है | घमंड को त्याग देता है | दुसरे के दुखों को निवारण करने में तन-नम-धन से सदा तत्पर रहता है | सदा अच्छे कर्म ही करता है वह परमात्मा का सच्चा प्रेमी होता है |
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