Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

क्या श्री स्वामी रामदेव‌ जी महाराज ईश्वर के अवतार हैं ?

पूज्य श्री स्वामी रामदेवजी महाराज आर्य समाज के गुरुकुल के स्नातक हैं, महर्षि दयानंदजी के अनुयायी हैं, और देश-धर्म के उत्थान के लिए सर्वात्मना लगे हुए हैं | उनकी लगन, समर्पण व प्रचंड पुरुषार्थ के प्रति हम नमन करते हैं | देशोद्धार तथा जनजागरण के कार्य में उनके द्वारा चलाया जा रहा देशव्यापी अभियान अपने आप में अपूर्व है |

मगर कल (दि. ८ दिसंबर २०१०, बुधवार) "आस्था १" चैनल पर भारतीय समय अनुसार रात को आठ बजे से प्रसारित होने वाले उनके कार्यक्रम को जब मैं देख रहा था, तब मैंने उसमें एक ऐसी बात सुनी जिसकी सूचना यहां देना चाहता हूँ | स्थान था - बिहार का मधुबनी नगर | पूज्य रामदेवजी को सुनने हेतु सहस्रों लोग वहां उपस्थित थे | कार्यक्रम के आरम्भ में स्वामी रामदेवजी की सहयोगी पूज्या बहिन सुमनजी का प्रारम्भिक वक्तव्य चल रहा था | उस वक्तव्य में मंच पर पूज्य रामदेवजी की उपस्थिति में पूज्या बहिन सुमनजी ने उन हजारों श्रोताओं के सम्मुख गीता का प्रसिद्ध श्लोक "यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत..." बोलकर आगे जो कहा उसका भाव कुछ इस प्रकार था क़ि — पूज्य रामदेवजी ईश्वर के अवतार हैं, वे अवतारी पुरुष हैं, वे अवतार लेकर आये हैं, आदि, आदि |

इस तरह अवतारवाद जैसी अवैदिक बात को प्रश्रय देना हमारी दृष्टि में सर्वथा अनुचित बात है | आशा है कि पूज्य रामदेवजी बहिन सुमनजी को ऐसी भ्रामक बात आगे से न करने का निर्देश देंगें | पूज्य रामदेवजी निःसंदेह प्रशंसा के पात्र सुयोग्य व्यक्ति हैं | उनकी यथार्थ स्तुति होनी ही चाहिए | मगर अतिशयोक्ति एवं मिथ्या प्रशंसा से बचना आवश्यक है | बस, केवल इतना ही निवेदन है | आशा है कि इसे अन्यथा नहीं लिया जाएगा |

= भावेश मेरजा

निश्‍चय ही

निश्‍चय ही उपरोक्त बयान कहीं भ्रामक स्थिति को पैदा करने का हेतु बन सकता है | लेकिन इस बयान से एक सबक भी सबको सीखने को मिल सकता है, और वह यह है कि , ठीक‌ इसी प्रकार ही जैसे आज पूज्यनीय स्वामी रामदेव जी को भगवान का अवतार घोशित करने की मनशा कुछ लोगों में पैदा हुई, जो कि उनके द्वारा किये जा रहे महान कार्य्य के कारण से सम्भवता पैदा हुई, ऐसी‍‍ ही स्थिती अन्य सभी महानतम मानवों के साथ भी रही होगी, जिसके कारण उन्हें भगवान का अवतार, पैगम्बर अथवा पुत्र घोषित किया गया, तथा जो आज तक एक विडम्बना के रूप में हमारी दुनिया में व्याप्त है | अतः पूज्यनीय स्वामी रामदेव जी के संदर्भ में कहे गये उपरोक्त उद्दाहरण से उस प्रक्रिया को समझा जा सकता है, जिसके कारण हम भगवान के अवतार बनाकर उन्हें पूजने लगते हैं और अन्ततः अपने कर्त्तव्यों से मुक्ति का सरल तरीका निकाल लेते हैं | अतः यहां पर पूज्य स्वामी जी को निश्‍चय ही महर्षि दयानन्द जी का अनुकरण कर किसी भी भ्रामक स्थिति से दुनिया को बचाने हेतु स्पष्ट करना होगा कि महान पुरुष महान पुरुष ही होते हैं ईश्‍वर कदापी नहीं | वैसे तो पूज्य स्वामी जी अक्सर ऐसा स्पष्ट कर‌ते रहते हैं, किन्तु विश्व में प्रचलित अन्धविश्‍वासों की परम्परा कहीं फिर से एक गलत मोड़‌ न ले, बल्कि इस माहन व्यक्तित्व से हम इन अन्धविश्‍वासों से मुक्ति पाने की और कदम बढ़ा सकें अतः पूज्य स्वामी जी का बयान इस दिशा में आवश्यक कदम होगा |