Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

श्रीमद् भगवद् गीता ‍ - एक मूल्यांकन ‍

"वैष्णव भक्त कहते हैं कि वेदों से गीता श्रेष्ठ है, परंतु स्वयं शंकर और कृष्ण भी वेद को श्रेष्ठ समझते हैं । अब गीता और वेद में विरोध हो तो गीता का प्रमाण असत्य, और वेद का सत्य ही मानना पडेगा । गीता में सब मंतव्य हैं । रामानुज, वैष्णव, शैव्य, द्वैत, अद्वैत, भक्ति, ज्ञान सब का उसमें थोडा-थोडा प्रतिपादन है । गीता एक खिचडी है । एक समय एक गवैया मूसल कपडे में लपेट एक राजा के पास आया । और कपडे में छिपाया हुआ मूसल दिखाकर कहने लगा कि यह संयुक्त बाजा है । यह अन्यान्य प्रकार के बाजों के साथ ही बजता है । राजा ने गवैयों को बुलाया, तब यह नया गवैया भी मूसल को अंगुलियां लगाकर बजाता हो ऐसा स्वांग करने लगा । राजा ने कहा - अब उसको बजाने दो । तब गवैया ने कहा कि यह तो संयुक्त बाजा है, अकेला नहीं बजेगा । यह साथ ही बजता है । चाहे आप बजा देखें । इसी तरह से गीता का भी है । गीता का प्रमाण स्वयं कुछ प्रतिपादन नहीं करता, परंतु दूसरे के साथ जैसा चाहो वैसा बजा लो । मैं इसमें गीता का कोई दोष है ऐसा नहीं कहता, परंतु वह स्वतः प्रमाण नहीं मानी जाती । "यदा यदा हि धर्मस्य" इत्यादि जो श्लोक हैं, वह (नवीन) वेदांत दृष्टि से ठीक है । (नवीन) वेदांत के अनुसार सब पदार्थ ब्रह्म है । तो पीछे कृष्ण ने क्या पाप किया कि वह ब्रह्म नहीं ? इस श्लोक का ऐसा अर्थ होता है कि कृष्ण मुक्तात्मा योगी होने से अपनी इच्छा के अनुसार जन्म पाने को कहते हैं । मुक्तात्मा योगी ईश्वर की ओर से ईश्वर की तरह ही उपदेश कर सकते हैं, ऐसा भी कह सकते हैं, परंतु कृष्ण स्वयं अपने आपको ईश्वर कहें, ऐसे अज्ञानी हों यह असंभव है ।"

(संदर्भ ग्रंथः "वैदिक सिद्धांत व्याख्यान माला", व्याख्यानकर्ताः श्री ब्र० स्वामी नित्यानन्द जी महाराज, द्वितीय संस्करण १९६१, पृष्ठ १३१‍‍‍‍ और १३२, प्रकाशक‍ः गोविन्दराम हासानन्द, दिल्ली)

= प्रस्तुतकर्त्ताः भावेश मेरजा

If shree krishna really said

If shree krishna really said that he will come again when there will be danger to our country then why does not he come now?Is adharma nowadays less?Actually it is more.Then why is he not coming back?It means that he said false.But the persons like The great Srhee Krishna cannot say false.So what about the meaning of this sholka.In my view the meaning cannot be right.I think that he might have said that when there will be danger to Bharat then a great person will come and will guard our country.Is it on the Shree krishna's hand that he will again take birth?It is in the hands of God.So he cannot say anything like this.So it is a doubtful question.Maharshi Dayanandji never agreed with this statement.So I cannot agree.

आदरणीय

आदरणीय भावेश‌ जी
क्या गीता श्री कृष्ण का अर्जुन को युद्ध भूमी में दिया गया ज्ञान है अथवा इसमें कुछ और भी मिलाया गया है ? क्या युद्ध में इतना अधिक ज्ञान देने का समय होता है ? क्या अर्जुन को यह सब कुछ ध्यान में रहा ? अथवा क्या महर्षि वेद‌व्यास जी जिन्होंने इस वार्त्ता को शास्त्र का रूप दिया सब कुछ सुन रहे थे व अपनी स्मृति में रख रहे थे ? क्या उन्होंने सब कुछ् सही सही पुनः उद्धृत किया ?
इस प्रकार के अनेक प्रश्न भी विचार करने चाहिए | एक रट लगा कर कहते जाना कि गीता वेदों का सार है, गीता भगवान द्वारा दिया गया ज्ञान है आदि आदि यह भावना में बह जाना ठीक नहीं है |
हमें वेदों का विस्तार चाहिए न कि सार क्योंकि मनुष्य की समझ बहुत छोटी है | इसे बार बार् विस्तार से समझाने की आवश्यक्ता होती है |
दूसरी बात यह भी विचारने योग्य है कि जब ईश्‍वर स्वयं प्रगट हुए मानव के रूप में , तब उसका क्या लाभ आम नागरिक को मिला ? क्या भगवान के दर्शन मात्र से सब जो उनके सम्मुख् आए तर गये ? ऐसा तो कहीं भी नही हुआ लिखा है | हां गोपियों के बारे में ऐसी कहानिया उपलब्ध हैं | तो क्या भगवान यदि प्रगट होकर भी कुछ कार्य ऐसा नहीं कर सके कि जिससे आम मनुष्य समझ लेता कि बस भगवान मिल गया है तो क्या आज उनकी मूर्ती के दर्शन , पूजन अथवा उनके नाम स्मरण से कोई अधिक लाभ हो सकता है ? कदापी नहीं | तो फिर हम केवल इसी में अपनी शक्‍ति क्यों गवाँ रहे हैं ? क्या भगवान का शारीरिक रूप कुछ भी विशेश कर सकता है जो कि अन्य नहीं कर सकते ? यदि हाँ तो भगवान इससे क्या दिखाना चाहता है ?

क्या इसी प्रकार के विचार से ही अनेकों अन्य मातावलम्बियों ने अनेक मनघढ़‌न्त कल्पनाएँ व उनसे विभिन्न मतों को जन्म नहीं दिया ? और क्या इस प्रकार की मनघढ़‌न्त मतों को रोकने का कोई अन्य उपाय, सिवा इसके कि हम एक सर्वव्यापक, निराकार ईश्‍वर पर विश्वास धरें , उसमे ध्यान लगाएं व सब स्थलों पर सब में उसकी सदा सदा अनुभूति कर अपना व विश्‍व का भला करें, विश्‍व शान्ति लाएं, हो सकता है ?

आर्य समाज श्री कृष्ण को योगेश्‍वर कृष्ण कहता है और उनके गुणों से अथाह प्रेरणा लेकर अपने आपको उस मार्ग‌ में चलाने का प्रयास करता है | बस वह नहीं करता तो उनके किसी शारीर की प्रतिमा का पूजन |

आनन्द

It looks from Anand

It looks from Anand Bakshiji's comment that Geeta was written by Ved Vyasji.So I suppose that it is right.But questions arise.Was Ved Vyasji in the war field?But no.He was not there.I have heard that he heard everything and saw also which was happening in the field while he was in the Raj Mahal.He was having Divya Drishti.And I believe that there can never be things like divya drishti.There is a lot of Pakhand about Geeta.