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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ज्ञान गोष्ठी में शन्कराचार्य जी से प्रश्न शंका समाधान‌

संगरूर में शक्ति भवन, माता महाकाली देवी मन्दिर में मैनें पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानन्द
सरस्वती जी महाराज की ज्ञान गोष्ठी में अपनी शंका रखी :‍
गीता प्रेस से छपे रामचरित मानस गुटके में गोस्वामी तुल्सीदास जी की संक्षिप्त जीवनी दी गयी है और अन्त
में लिखा गया है कि

"भगवान विश्वनाथ के सामने सब के ऊपर वेद, उसके नीचे शास्त्र, शास्त्रों के नीचे पुराण और् सबसे नीचे
रामचरित मानस रख दिया | मन्दिर बन्द कर दिया गया | प्रात:काल जब मन्दिर खोला गया तो लोगों
ने देखा कि श्री रामचरित मानस वेदों के ऊपर रक्खा हुआ है|"
कृपया मेरी शंका का निवारण करें, क्या ये वेद का अपकर्ष तो नहीं है ?

शन्काराचार्यजी ने कहा कि इसमें वेद का बिल्कुल अपकर्ष नहीं है क्योंकि श्रीमद भागवत पुराण के
प्रारम्भिक श्लोकों में लिखा है कि वेद सब ग्रन्थों का आधार है और रामचरित मानस भी वेदों की
महिमा का ही बखान करता है|

आगे उन्होंने कहा कि आर्यसमाज और हमारे परमात्मा में अन्तर है "हमार ईश्वर जगत
बनाता भी है और जगत बनता भी है परन्तु आर्यसमाज का ईश्वर जगत बनाता तो है परन्तु
जगत बनता नहीं है|
परन्तु शंकराचार्यजी ने मेरी उस शंका का निवारण नहीं किया कि वेद ऊपर से नीचे
कैसे आ गये ये चमत्कार कैसे हुआ ?

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
लगता है कि शन्कराचार्यजी की मति मारी गयी।इससे वेदों का अपकर्ष क्यों न होता है?यदि वेद सबका आधार है तो उसे सबसे ऊपर रखना ही श्रेष्ठ है क्योंकि यदि वो सबका आधार है तो उसे सबसे पहले पढना पडेगा और यह तब सुविधाजनक है जब यह ऊपर ही रखा जाय।और उनके चमत्कारों का क्या कहें?चमत्कार जैसी कोई चीज होती ही नहीं है।यह आज का विज्ञान भी मानने लगा है।फिर भी इन जैसे लोग नहीं सुधर रहें हैं।

मेरे विचार

मेरे विचार मे वेदो का अपकर्ष नही है

क्योकि वेद वो नही जो कागज पर स्याही से लिखे गये है, वेद तो नित्य और सत्य हैं बिना कागज और स्याही के भी वेद थे और रहेंगे, दूसरा ये के यदि मक्खी राजा के सिहांसन पर बैठ जाये तो वो राजा नही होती।

हा, ये कहना कि कोई अन्य पुस्तक(मनुष्य के विचार) वेदो से बडे है, यह वेदो का अपकर्ष है।

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
Look at it from different angles.

if you always want to see

if you always want to see yourself shameful then you will feel always. No one can help you.

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
The angle about which I am talking about is this.The Vedas were originated from the Ishwara and are always inside him and will never die.It is true.Now,if a great person like a sabhasad sits at the lower position in the seat then there is not problem with the sabhasad.But now you should look at the person who are sitting at the higher seats in the raj sabha,they did not even tried to see the greatness of sabhasad.The raj sabha's persons must give their higher seats to the sabhasd.Similarly,Vedas should be kept at the highest position.Now,any suggestion is welcome.But why are talking about my charitra.My charitra is completely bad.I used to see sex videos and used to talk about them with my friends.I am completely a bad person.Everyone on this forum knows this fact.There were many posts posted by me.In which there was a lot of discussion.But I deleted them because they were of no use for the persons who do not wanted the truth.I have done many sins in y life.I am not any Ram and Krishna whose character should be seen by you.

dear, why dont you try to

dear, why dont you try to make yourself open minded, why you made yourself close and rigid. you said in your words that vedas are voice of God. so what the fight for keeping the books(called vedas) above or below.

Sawami Dayanand also said that if all book wud not be on this earth, vedas wud alive....

and please dont bitter truth for you and anyone else. some truth are of no use. you know your personal life does not affect me, but your mental and spritual way of living affect many.

smile always and be analytical... you are to do a lot of work.

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
तो फिर राजा आज से नीचे बैठेगा???

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
mai vedo kaa nitya adhyayana karataa huu usame kahaa gyaa hai ki raajaa uupara baithe.

ज्ञान

ज्ञान गोष्ठी में शन्कराचार्य जी से प्रश्न शंका समाधान‌
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Submitted by Rajendra P.Arya on Mon, 2011-05-16 13:41. Questions/Answers
संगरूर में शक्ति भवन, माता महाकाली देवी मन्दिर में मैनें पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानन्द
सरस्वती जी महाराज की ज्ञान गोष्ठी में अपनी शंका रखी :‍
गीता प्रेस से छपे रामचरित मानस गुटके में गोस्वामी तुल्सीदास जी की संक्षिप्त जीवनी दी गयी है और अन्त
में लिखा गया है कि

"भगवान विश्वनाथ के सामने सब के ऊपर वेद, उसके नीचे शास्त्र, शास्त्रों के नीचे पुराण और् सबसे नीचे
रामचरित मानस रख दिया | मन्दिर बन्द कर दिया गया | प्रात:काल जब मन्दिर खोला गया तो लोगों
ने देखा कि श्री रामचरित मानस वेदों के ऊपर रक्खा हुआ है|"
कृपया मेरी शंका का निवारण करें, क्या ये वेद का अपकर्ष तो नहीं है ?

शन्काराचार्यजी ने कहा कि इसमें वेद का बिल्कुल अपकर्ष नहीं है क्योंकि श्रीमद भागवत पुराण के
प्रारम्भिक श्लोकों में लिखा है कि वेद सब ग्रन्थों का आधार है और रामचरित मानस भी वेदों की
महिमा का ही बखान करता है|

आगे उन्होंने कहा कि आर्यसमाज और हमारे परमात्मा में अन्तर है "हमार ईश्वर जगत
बनाता भी है और जगत बनता भी है परन्तु आर्यसमाज का ईश्वर जगत बनाता तो है परन्तु
जगत बनता नहीं है|
परन्तु शंकराचार्यजी ने मेरी उस शंका का निवारण नहीं किया कि वेद ऊपर से नीचे
कैसे आ गये ये चमत्कार कैसे हुआ ?

‹ IIT Delhi, is not aware about the logic/vedas?योग ›
Always accept the truth and
Submitted by The demon of de... on Mon, 2011-05-16 15:03.
Always accept the truth and decline the false
लगता है कि शन्कराचार्यजी की मति मारी गयी।इससे वेदों का अपकर्ष क्यों न होता है?यदि वेद सबका आधार है तो उसे सबसे ऊपर रखना ही श्रेष्ठ है क्योंकि यदि वो सबका आधार है तो उसे सबसे पहले पढना पडेगा और यह तब सुविधाजनक है जब यह ऊपर ही रखा जाय।और उनके चमत्कारों का क्या कहें?चमत्कार जैसी कोई चीज होती ही नहीं है।यह आज का विज्ञान भी मानने लगा है।फिर भी इन जैसे लोग नहीं सुधर रहें हैं