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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : शक्तिदायिनी सरस्वती

ओ3म् पावका न: सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती |
यज्ञं वष्टु धियावसु: || साम 189 ||

मेधा शरीर दोनों के ही, प्रभुवर तुम शक्ति प्रदाता हो |
प्रभुवर तुम शक्ति पिता मेरे, प्रभु तुम्हीं ज्ञान की माता हो ||

बढती विद्द्या रस बरसाती,
हम को कोमल नम्र बनाती,
धी मानस को करके पवित्र
वाणी में माधुर्य बढाती |

रसना में वसना सरस्वती, सुन मनुज निकट आ जाता हो|
प्रभुवर तुम शक्ति पिता मेरे, प्रभु तुम्हीं ज्ञान की माता हो ||

मेरा शरीर कृशकाय न हो,
संकट क्षण में असहाय न हो,
इसको बलवान बना दो मां
यह जीर्ण शीर्ण निरुपाय न हो|

रसना को कसना अन्नमती, मत हिन्सक रस से नाता हो|
प्रभुवर तुम शक्ति पिता मेरे, प्रभु तुम्हीं ज्ञान की माता हो ||

यह देह बुद्धि शुभ कर्म करे,
हर संभव यह सद् धर्म धरे,
दीन दुखी पर दया दिखा कर
हर युद्ध यज्ञ जय मर्म वरे |

हो बुद्धि देह सत्कृती व्रती वर विश्व विमल निर्माता हो |
प्रभुवर तुम शक्ति पिता मेरे, प्रभु तुम्हीं ज्ञान की माता हो ||

(साम वन्दना )

ओ3म् साइट

ओ3म्
साइट प्रबन्धक महोदय, नमस्ते |

कृपया बताने का कष्ट करें ड और ढ के नीचे बिन्दी कैसे लगेगी |

धन्यवाद |

राजेन्द्र आर्य‌

आर्य

आर्य जी
यदि आप Hinglish Typewriter का प्रयोग कर रहे हैं तो ड़ के लिए [D.a] व ढ़ के लिए [Dh.a] प्रयोग करें |

आनन्द‌

मान्य

मान्य आनन्द जी नमस्ते
जानकारी के लिये धन्यवाद

ढ़ ड़

राजेन्द्र आर्य‌