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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : शान्ति-सुमन‌

ओ3म् शन्नो देवीरभिष्टये शन्नो भवन्तु पीतये|
शंयोरभि स्त्रवन्तु न: || साम 33||

तुम देव पिता तुम देवी मं, प्रभु हमको शान्ति प्रदान करो|
तन‌-मन जीवन हो शान्ति-सुमन, दे शान्ति आत्म उत्थान करो||

सुख शान्ति चाहिये जो हम को,
सुख शान्ति चाहिये वह सब को,
एक अकेले हम को ही क्या
दो शान्ति जगत के जनमन को|

आनन्द स्त्रोत सर्वत्र बहे, जल मधुर सुशीतल दान करो|
तन- मन जीवन हो शान्ति- सुमन दे शान्ति आत्म उत्थान करो||

सद्बुद्धि- बुद्धियां सबकी हों,
सद्ज्ञान ज्योतियाँ जिनकी हों
अज्ञान न हो अन्याय न हो
सद् स्नेह दृष्टियाँ सबकी हों|

आरोग्य सभी को मिल जाए, वसुधा में सुधा निधान करो|
तन मन जीवन हो शान्ति सुमन, दे शान्ति आत्म उत्थान करो||

प्रभु वर सुख की वर्षा कर दो,
भू कुटी महल सब तर कर दो,
निर्झर सरिता तालाब कुछ
सर्वत्र स्नेह का रस भर दो|

बन्धुत्व शान्ति की हवा बहे, प्रभु पूर्ण यही वरदान करो|
तन मन जीवन हो शान्ति सुमन, दे शान्ति आत्म उत्थान करो||

(साम वन्दना)

नमस्कार हे

नमस्कार हे राजेन्द्र आर्यजी,

आप के ध्वारा लिखित यह साम वन्दना युक्त लेख अति सुन्दर है | किन्तु यह लेख के आरंभ मे जो साम वेद के मन्त्र का उल्लेखन है, क्या उसके भाष्य के लिए इतने सारे विधान की आवश्यकता होती है , या कदाचित उपर्युक्त लेख मे अन्य वेद मन्त्रो का भाष्य भी सम्मिलित है | तथापि एक अधिक प्रश्न भी है , यह साम वन्दना का उद्देश्य क्या है |
-कुशल‌

प्रिय कुशल

प्रिय कुशल जी नमस्ते

सामवेद के एक मन्त्र का पूरा भावार्थ लिये हुए पूरा गीत है आनन्द लेते हुए मन्त्र गीत का गायन करें
धन्यवाद

शुभेच्छु,
राजेन्द्र आर्य
9041342483

Sh.Rajinder ji---------First

Sh.Rajinder ji---------First achman mantar(yujurved 36/12) contains aapo instead of shanno.Can we have brief meaning of above mantar as compared to first achman mantar.
OM
Ramesh

मान्य रमेश

मान्य रमेश जी,

आचमन मन्त्र यजुर्वेद ||36|12|| का है जिसमें "आपो भवन्तु पीतये"
जबकि सामवेद ||33|| मन्त्र में "शन्नो भवन्तु पीतये" ही है जिसका भावार्थ
गीत अनुसार है और भी पद्दार्थ है:

तेरि दिव्य विभूतिमय दृष्टि, सुख आशीषों की वृष्टि करे,
कल्याणपूर्ण सब जग होवे, जब ईश कृपा की दृष्टि करे|

अत: सामवेद का 33वं मन्त्र आचमन के यजुर्वेद के 36/12 मन्त्र मे केवल आपो और
शन्नो का ही अन्तर है सामवेद में आपो नही‍ शन्नो शब्द है और मैं साम वन्दना
शीर्षक देकर प्रस्तुत कर रहा हूँ ध्यान रहे |

शुभेच्छु:

राजेन्द्र आर्य
9041342483
email: rajenderarya49@gmail.com

स‌