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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : हर समय करे यह हृदय नमन‌

ओ3म् उप त्वाग्ने दिवे दिवे दोषावस्तर्धिया वयम्|
नमो भरन्ति एमसि|| साम 14 ||

करें प्रात: सायं स्तुति तेरी, हर पल, हर क्षण, मैं प्रणाम करूं,
स्तुतिमय मम जीवन प्रभु हो, इक क्षण को भी न विराम करूं |

विस्तृत संसृति का कण कण, अथवा इस जीवन का क्षण क्षण |
हर कहीं तुम्हारा भरे नमन, हो तुम्हें नमन, हो तुम्हें नमन ||

हम साथ तुम्हारा छोड़े ना,
तुमसे किञ्चित मुँह मोड़े ना,
तुमसे जो नाता जोडा है
वह थोडा भी हम तोडे ना |

अभिमान रहित हो मेरा मन, मन करे नमन, मन करे नमन|
हर कहीं तुम्हारा भरे नमन, हो तुम्हें नमन, हो तुम्हें नमन ||

प्रभु रहते साथ हमारे हैं,
हम रहते साथ तुम्हारे हैं,
प्रत्येक दिवस पलनिशि वासर
थामें बल बुद्धि सहारे हैं|

सुमिरन में रहती शक्ति सघन, तव नमन हमारा जीवन धन |
हर कहीं तुम्हारा भरे नमन, हो तुम्हें नमन, हो तुम्हें नमन ||

तुम्हें हमारी ज्ञात साधना,
शेष रह गयी कौन कामना,
तुमने दिया सभी कुछ प्यारे
शेष कामना एक याचना |

हो सदय शन्ति की विनय वहन, हर समय करे यह हृदय नमन|
हर कहीं तुम्हारा भरे नमन, हो तुम्हें नमन, हो तुम्हें नमन ||

Hinglish Typewriter से

Hinglish Typewriter से कुछ त्रुटियाँ रह जाती हैं जैसे उपरोक्त गीत में सुमिरन के स्थान पर
सुनिरन लिखा गया शान्ति के स्थान पर शन्ति लिखा गया

गई गैइ में गड़बड़ हो जाती है गयी लिख देता हूँ

द में व् नहीं जुड़ता भारद्वाज लिखा जाता है
आदि कोई और भी नया हो तो सम्झाने का कष्ट करें
धन्यवाद

राजेन्द्र आर्य
9041342483

Hinglish Typewriter ही

Hinglish Typewriter ही मुझे बहुत सरल लगा था अतः मैं इसका ही प्रयोग कर रहा हूँ |

ग‍ई लिखने हेतु gaii के स्थान् पर् इस प्रकार लिखें ga-ii | - आधा शब्द बिना जुड़े लिखने में काम आता हे | इसे दोनों अक्षरों के बीच में प्रयोग करें |
भारद्वाज तो लिखा जाता है ? शायद आप कुछ अन्य कह रहे हैं ? सुमिरन व शान्ति में तो कठिनाई नहीं आई | जैसे sumirana, shaanti |
यदि English के लिखे शब्द के ठीक बाद बिना स्पेस दिये Hinglish Typewriter का प्रयोग करते हैं तो आखरी अक्षर हिन्दी में रूपान्तरित हो जाता है | अतः इसके लिए English अक्ष‌र के पश्चात स्पेस दे कर ही हिन्दी टा‍ईपराईटर में आएं |

टा‍ईपराईटर लिखने के लिए भी Taa-iiparaaiiTara लिखना पड़ेगा |

ऋषि क्ष ट्राई में ट्रा के लिए, ग्रृ के लिए, |, सः के लिए RrSi, KSa, Traaii, gra`, |, sa:h लिखें | जैसे इनसे बनें ऋषि, क्ष, ट्राई, ग्रृ | सः केवल sa: लिखने से स: बनेगा

कुछ कठिनाई इस प्रकार तो आती है | आगे अनुभव का आदान प्रदान किया जा सकता है |

आगे यह मन्त्रार्थ भी अत्ति उत्तम भावों को जगा रहा है, बस हमारी अपनी सीमाएँ अभी हमें रोक रहीं हैं |

बहुत 2 धन्यवाद आचार्य जी
|

आनन्द‌