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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : सामगान‌

ओ3म् इन्द्राय साम गायत विप्राय बृहते बृहत् |
ब्रहम्कृते विपश्चिते पनस्यवे || साम 388 ||

विधि के विरुद्ध इस सृष्टि का, तृण भी न हिले सौ उपाय करे,
प्रभु स्वयं सहायक सृष्टि का, उसका क्या कोई सहाय करे |
क्यों मौन पड़े मेरे मनुआ, तुम गाओ अब खुलकर गाओ |
कुछ ऐसा वैसा गीत नहीं, सामगान तुम आज सुनाओ ||

स्वर मधुर छन्द का हर गायन,
साम सुहाये सबको गायन,
यह साम साम हो बृहत साम
प्रभुवर तक जाये जो गायन |

प्रभु महान को गान सुनाओ, आनन्द स्वयं गाकर पाओ |
कुछ ऐसा वैसा गीत नहीं, सामगान तुम आज सुनाओ ||

ऐश्वर्य बली वह परमेश्वर,
वर बुद्धि प्रदाता परमेश्वर
वह लघुतम को करता महान
दे वेद प्रेरणा परमेश्वर |

वह सूक्ष्म चेतनादायक है, उसको उसका गान सुनाओ |
कुछ ऐसा वैसा गीत नहीं, सामगान तुम आज सुनाओ ||

कब उसकी यह लाचारी है,
वह इसका तो अधिकारी है,
उसका गायन पाठ प्रदायन
गायक पाता यश भारी है |

मुक्तकण्ठ से गायन गाओ, गायन् जीवन सार बसाओ |
कुछ ऐसा वैसा गीत नहीं, सामगान तुम आज सुनाओ ||

(साम वन्दना)