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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना | होता और‌ विधाता

होता और विधाता_____

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ओ3म् त्वमग्ने यज्ञानांहोता विश्वेषां हित‍: |
देवेभिर्मानुषे जने || साम 2 ||

आनन्द हमें मिल जायेगा, यदि तुमसे अपना नाता हो |
प्रभु मेरे जीवन यज्ञों के, तुम होता और विधाता हो ||
हे प्रभारूप ईश्वर प्यारे.
सृष्टि यज्ञ तुमने विस्तारे,
इस जग के तुम हितकारी हो
इसके हो आधार सहारे |
श्रेष्ठ कर्म की पुण्य प्रेरणा, उत्साह अपरिमित दाता हो |
प्रभु मेरे जीवन यज्ञों के तुम होता और् विधाता हो ||
प्रभु गुण‍‍ चिन्तन की ले चाबी,
हम मनन शील हों मेधावी,
प्रभु के गुण दर्श आचरण से

हो प्रभु के गुण दर्श आचरण से
हो भाग्य हमारा उदभावी |
भगवान समझ लो साथ चलें, यदि उनके गुण का छाता हो |
प्रभु मेरे जीवन यज्ञों के, तुम होता और् विधाता हो ||

(साम वन्दना : देव नारायण भारद्वाज से साभार )

प्रेषक: राजेन्द्र आर्य
362 ए , गुरुनानकपुरा, सुनामी गेट
संगरूर 148001 (पंजाब) भारत
9041342483