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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : उदयबोध‌

ओ३म् नदं व ओदतीनां नदं योयुवतीनाम् |
पतिं वो अध्न्यानां धेनुनामिषुध्यसि || साम १५१२ ||

तुम लोग प्रार्थना हे मनुष्य, अपने पालक ईश्वर की करो,
उपदेष्टा जो ऊषाओं का, संयोजक शशि का, वरण करो |

हे मेरे प्यारे उपदेशक, विनय‌ हमारी सुनकर आओ |
जिससे उत्थान हमारा हो, वह हमको उपदेश सुनाओ ||

उपदेश लिये हो उदय बोध,
हो साथ उदय के सदय शोध,
हमको जिससे प्रोत्साहन हो,
हट जांयें अनर्गल हृदय रोध |

वेद मन्त्र तुम आकर गाओ, उनसे हमको सुपथ दिखाओ |
जिससे उत्थान हमारा हो, वह हमको उपदेश सुनाओ ||

हम चलें साथ संयुक्त बनें,
संयुक्त सभी बलयुक्त बनें,
गुण अवगुण श्रुति विश्लेषण से
सब सहयोगी उपयुक्त बनें |

यों युवक उदय को उमगाओ, सभी परस्पर प्रेम बढ़ाओ |
जिससे उत्थान हमारा हो, वह हमको उपदेश सुनाओ ||

यज्ञ अहिंसा अनुशासन हो,
संवेदनशील प्रशासन हो,
हों गौयें विकसित उपकारी
हा। हनन न उनका ह्रास न हो |

श्रुति रक्षक उपदेशक आओ, सुखदायक अनुदेश बताओ |
जिससे उत्थान हमारा हो, वह हमको उपदेश सुनाओ ||

राजेन्द्र आर्य‌