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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : तुम्हारा नित्य नमन‌

ओ३म् नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देवकृष्टय:| अमैरमित्रमर्दय ||साम ११||

हे परमेश्वर दो शक्ति हमें, हम करें शत्रुओं का मर्दन |
सब दुष्ट नष्ट करके प्रभुवर, हम करें तुम्हारा नित्य नमन ||

हे देव दयानिधि परमेश्वर, तुझे कोटि कोटि प्रणाम करुँ,
मम दिव्य शक्ति बढ़ती जाये, स्तुति से पाप अनाम करुँ |
व्यवसायी कृषक श्रमिक सारे,
हो रहे मनुज क्यों दुखियारे,
जब प्रगति- पन्थ पर बढ़ते वे
शत्रु वहाँ क्यों पैर पसारे |

सद्शक्तिदेव से ले सज्जन, दे तोड़ शत्रुओं की गर्दन |
सब दुष्ट नष्ट करके प्रभुवर, हम करें तुम्हारा नित्य नमन ||

मनुज तुम्हारा गुणगान करें
तव तेज ओज का मान करें,
अनमोल पराक्रम धारण कर
निज सफल स्वयं अभिमान करें |

तव तपस तेज बल का प्रभुवर, हो सज्जन समाज में वर्धन |
सब दुष्ट नष्ट करके प्रभुवर, हम करें तुम्हारा नित्य नमन ||

मद- काम क्रोध पद मोह भरा,
जीवन में अगणित लोभ भरा,
यह शत्रु नियन्त्रित हो जायें
तब जीवन हो आमोद भरा |

यों प्रभुवर के बल वैभव से सर्वत्र सुनहरा हो सर्जन |
सब दुष्ट नष्ट करके प्रभुवर, हम करें तुम्हारा नित्य नमन ||