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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ATTACK ON SWAMI AGNIVESH

दि. २६ मई को अहमदाबाद में आयोजित श्री अन्ना हजारे के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में श्री स्वामी अग्निवेश के साथ एक महंत ने दुर्व्यवहार किया, जिसके समाचार टीवी एवं समाचारपत्रों में प्रसारित-प्रकाशित हुए हैं |

समाचारों में कहा गया है कि उस महंत ने बताया है कि अमरनाथ के बारे में किए गये स्वामी अग्निवेश के विधान को लेकर वह अप्रसन्न था और इसीलिए उन पर आक्रमण किया |

यह सुविदित है कि स्वामी अग्निवेश आर्य समाज के "सर्वमान्य नेता" नहीं हैं और विभिन्न विषयों को लेकर वे प्रायः विवादास्पद बने रहते हैं |

मगर उन पर या देश के किसी भी अन्य नागरिक पर इस प्रकार का हमला हो, उसे सभ्य समाज का लक्षण नहीं माना जा सकता | विचार-भेद हो सकते हैं, मगर केवल इसी कारण कोई इस प्रकार हिंसा का प्रयोग करे यह अनुचित है |

अत: इस प्रकार की हिंसक घटना की यथायोग्य निंदा होनी चाहिए | विचारों की दूरियाँ परस्पर संवाद और विचार-विनिमय से दूर करना सभ्यता है |

आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद जी ने 'सत्यार्थ प्रकाश' के ११ वें समुल्लास में अमरनाथ के सम्बन्ध में अपना मंतव्य लिखा है | सुधी पाठक वहां देख सकते हैं |

= भावेश मेरजा

आज

आज आर्यसमाज का संगठन कमजोर होने का कारण स्वामी अग्निवेशजी महाराज जी की विवादास्पद
बयानबाजी और आर्यसमाज को मुकदमेबाजी में उलझाकर वेद प्रचार मे‍ रुकावट बनना ही है यदि
आर्यसमाज में नियमानुसार मिलजुलकर कार्य किया जाता तो आर्यसमाज की उन्नति होकर
संगठन मजबूत होने से किसी गैर आर्यसमाजी की क्या मजाल कि कोई आर्य सन्यासियों
से अभद्र व्यवहार कर सके | इसलिये स्वामीजी को चाहिये की पद लोलुपता, विरुद्ध बयानबाजी,
मुकदमेबाजी का परित्याग करते हुए आर्यसमाज को उन्नति के शिखर पर ले जाने में सहायक
बनें | आज आर्यसमाज में उनके समर्थन मे कोई लहर न होने से इस अभद्रता का शिकार
होना पड़ रहा है परन्तु आर्यसमाज् का सन्यासी होने के कारण इसमें आर्यसमाज भी
अपमानित हो रहा है अत: हमें उस पाखन्डी महन्त की निन्दा करते हुए उस पर मानहानि
का मुकदमा दायर करवाकर उसे जेल की हवा खिलवानी चाहिये | स्वामीजी को भी यह अपमान
सहन नहीं करना चाहिये | मैं आशा करता हुँ कि उस पाखन्डी महन्त को अवश्य दण्डित किया
जायेगा | अगर किसी को ऐसे बयानों पर ऐतराज है तो स्वामीजी के साथ शास्त्रार्थ करके
अपना पाखण्ड निवारण करे | महर्षि दयानन्द रचित सत्यार्थ प्रकाश पर कुठाराघात करने
वालों से सावधान रहने के लिये सभी आर्यों को एकजुट होकर आर्यसमाज् को उन्नति के
शिखर पर ले जाना चाहिए ताकि संगठन सूक्त का घोष सार्थक होवे|

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
सप्रेम नमस्ते
मेरे पिताजी कहतें हैं कि पहले आर्य सन्यासी हमारे इस लघु कस्बे में भी आया करते थे।किंतु आजकल उनका नमोनिशान नहीं है।आर्य समाज की पत्रिकाओं से पता चला की यह हाल पूरे देश में है।इसका कारण वह पत्रिका यह बताती है कि आर्य समज पर बुरे लोगों की नजर है।अतः हमें सावधान रहना चाहिये।