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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

साम वन्दना : स‌खा बनाया

योगे योगे तवस्तर वाजे वाजे हवामहे|
सखाय इन्द्रमूतये||साम १६३||

तुमसे प्रभु जब से मेल किया, हमने अकूत बल पाया है|
नित अपनी रक्षा के निमित्त, प्रभु तुमको सखा बनाया है||

मेरे परमेश्वर इन्द्र बली,
तुमसे बढ़कर कौन बली,
तुमसे मिलाप हो जाने पर
छट जाय आपदा की बदली|

तुम परम इन्द्र हम मनुज इन्द्र, तव साथ सखा के खाया है|
नित अपनी रक्षा के निमित्त, प्रभु तुमको सखा बनाया है||

यह युद्ध आपदा आन पड़ी,
आ रहे याद तुम घड़ी घड़ी,
दो हमें आत्मिक बल अपना
थक शरण तुम्हारी प्रभु पकड़ी|

सुनते पूकार परमेश्वर हैं, संवाद योग से आया है|
नित अपनी रक्षा के निमित्त, प्रभु तुमको सखा बनाया है||

तुम सखा बनो या बनो सखी,
हो सखा सखा के साथ सुखी,
हो युद्ध भूमि या प्रीती भोज
सर्वत्र सखा ने लाज रखी|

सखा तुम्हारे गुण व्यञ्जन का, अब स्वाद सखा ने पाया है|
नित अपनी रक्षा के निमित्त, प्रभु तुमको सखा बनाया है||

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हम मित्र परस्पर युद्धों में, याचक हैं माँगें दया तेरी,

तू बली ब्रह्म अद्‍भुत रक्षक, रक्षार्थ करें हम स्तुति तेरी |