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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

संगरूर जिले की आर्यसमाजों की गतिविधियां

संगरूर जिले और आसपास की आर्यसमाजों में स‍गरूर, धुरी, मलेरकोटला, बरनाला, तपा, अहमदगढ़,
इन्द्रा बस्ती सुनाम एवं आसपास की राजपुरा, समाना, पटियाला,चंडीगढ़. नाभा आदि सभी आर्यसमाजों
का आपसी सहयोग से प्रतिवर्ष वेद प्रचार उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है जिनमें उच्चकोटि
के विद्वान एवं भजनोपदेशकों के सानिध्य मे विशाल‌ स्तर पर आयोजन होता है|
साप्ताहिक सत्संग हर रविवार को प्रात: ८ बजे से १० बजे तक के कार्यक्रम की रूपरेखा:

८ से ९ बजे तक = सन्ध्या, यज्ञ, सं‍गठन सूक्त काव्यात्मक |
९ से ९.३० तक = भजन
९.३० से १० तक = वेद प्रवचन, सूचनाएं, शान्ति पाठ
जय घोष : जो बोले से अभय = सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय |
मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम चन्द्र की : जय हो
योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण चन्द्र की : जय हो
धर्म धुरन्दर जगतगुरु महर्षि दयानन्द की : जय हो
ग‍ऊ माता की : रक्षा हो
आर्यसमाज : अमर रहे
वेद की ज्योति : जलती रहे
ओ3म् का झण्डा : ऊँचा रहे
वैदिक ध्वनि : ओ३३३३३३म्
प्रिय वैदिक संस्क्रृति का सर्वश्रेष्ठ अभिवादब:
नमस्ते पाठ: १. पहली नमस्ते परमपिता को जिसने जगत रचाया है |
२. दूजी नमस्ते माता पिता को जिन्होंने गोद खिलाया है|
३. तीजी नमस्ते गुरुजनों को जिन्होंने हमें पढ़ाया है|
४. चौथी नमस्ते प्यारे ऋषि को वेदों का ज्ञान कराया है|
५. पांचवीं नमस्ते मातृभूमि को जिससे से जीवन पाया है|
६. छठी नमस्ते वीर शहिदों को देश आजाद कराया है |
७. सातवीं नमस्ते आप सभी को आप का दर्शन पाया है|

आदरणीय

आदरणीय आचार्य जी
नमस्ते

यह नमस्ते के पाठ की विधि बहुत रौचक प्रतीत होती है | इसे सभी अपने 2 समाज में प्रयोग करके देख सकते हैं | यह अवश्य ही लाभकारी होगी |

आनन्द