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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

श्रद्धा

नमस्ते
आज मैं आपके समक्ष श्रद्धा का अर्थ रखता हूँ।
श्रद्धा =श्रत् + धा
श्रत्=सत्य धा=ध्यान
श्रद्धा=सत्य का ध्यान
तो सत्य का ध्यान करना ही श्रद्धा कहलाती है।विश्वास नहीं होता है श्रद्धा।आजकल के भोले-भाले लोग श्रद्धा यानी विश्वास समझ लेते हैं।विश्वास तो असत्य का भी हो सकता है।जैसे आप अँधेरे में जा रहे थे और आपके सामने एक रस्सी पडी हुई थी।आपने उस रस्सी को साँप समझ लिया।और आपने उस बात पर विश्वास भी कर लिया।तो आपकी कितनी हनी होती है यह आप देख ही सकतें हैं।तो इसलिये हमें श्रद्धा का अर्थ विश्वास न समझना चाहिये।
हमारे सब शास्त्र कहते हैं कि श्रद्धा को अपनाओ।लेकिन यदि हम श्रद्धा का अर्थ विश्वास समझें तो हमें हमारे शास्त्र गलत दिखायी पडते हैं।
किंतु श्रद्धा का अर्थ यदि सत्य का ध्यान समझ लिया जाय तो क्या होता है?जो व्यक्ति सत्य का ध्यान करता है वह उन्नति को प्राप्त होता है।क्योंकि जो व्यक्ति सत्य के अनुसार काम करता है वह ही उन्नति को प्राप्त होता है।
धन्यवाद
विनय आर्य

Always accept the truth and

Always accept the truth and decline the false
The meaning is not just faith but the faith in the truth.