यदि मुक्ति चाहिये तो

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सबसे पहले ये सोचना कि तुम किस पदार्थ से मुक्ति चाहते हो?कहीँ यह तुम्हारा क्षणिक वैराग्य तो नही है?कहीँ फिर से उसी पदार्थ का आश्रय ना लेना पड जाये जिससे तुम मुक्त होना चाहते हो।यदि वास्तविक मुक्ति चाहिये तो ज्ञान के सिवाय कोई दूसरा माध्यम नही है।क्योँकि शास्त्र कहता है कि ज्ञानान्न मुक्ति।धन्यवाद