Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग
हिंसामुक्त मातृ मंदिर
लेखक- मुकुन्ददास राठी

एक पारिवारिक अनुष्ठान के समापन पर मैंने अपने पारिवारिक पुरोहित ब्राह्मण देवता से निवेदन किया कि मुझे कोई पशुबलि की कुप्रथा से मुक्त देवी-मंदिर बताइये। बंग-भूमि में ऐसा मंदिर दुर्लभ है, किन्तु पण्डित जी मुझे ऐसे ही एक प्राचीन मंदिर में ले गये। यह मन्दिर सर्वमंगला माता चित्तेश्वरी देवी का था। मैंने प्रसन्नतापूर्वक सपरिवार मॉं भगवती की पूजार्चना की।

उत्सुकतावश मैंने मन्दिर में हिंसामुक्त होने का रहस्य पूछा, तो मन्दिर के अत्यन्त वृद्ध पुजारी जी ने बताया- ""संवत्‌ 1992 विक्रमी में पण्डित रामचन्द्र शर्मा "वीर" ने यहॉं आकर अपने हाथों से पशुबलि का खूँटा उखाड़ दिया था। उसके बाद यहॉं पशुबलि नहीं हुई।''

मैं रोमांचित हो उठा। अनायास ही पूज्य श्रद्धेय महात्मा वीर जी महाराज की कीर्ति के एक दिव्य स्मारक को प्रत्यक्ष देखने का सुयोग मिला।

पावन विचार

सत्य सनातन वैदिक धर्म विश्व के समस्त मत मतान्तरों, मजहबों एवं सम्प्रदायों से करोड़ों वर्ष पूर्व का है। वेद संसार के सर्वप्रथम ग्रन्थ माने जा चुके हैं। यदि हम वेदों से ही सन्तुष्ट रहते तो हमारे पतन का कारण ही उपस्थित न होता सनातन वेदों से हम समस्त सांसारिक सुख-साधनों से सम्पन्न रह सकते थे और पारलौकिक कल्याण के हित भी सिद्धियॉं प्राप्त कर सकते थे। किन्तु पण्डितों ने वेदों की उपेक्षा करके अनेक ऐसे ग्रन्थों का निर्माण कर डाला, जो अनाचार-दुराचार का प्रचार करने के लिये रचे गये थे। - महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज

प्रेषक

राजेन्द्र आर्य‌

आचार्य

आचार्य जी
एक बहुत महत्त्वपूर्ण बात जो कोई समझ नही पा रहा है, वह यह है कि वेद व अन्य शास्त्रों की शिक्षाओं में क्या भेद है | उन्हें सभी शिक्षाएं सभी जगह एक जैसी ही दीखती हैं | इसीलिए अकसर लोग कहते दीखते हैं कि सभी धर्म एक समान हैं |

जो अति महत्त्व पूर्ण अन्तर है, वह यह है कि एक जैसी शिक्षा होते हुए भी, वेद की शिक्षाओं में Anti Virus अंतर्निहित है जो अन्य ग्रन्थों में नदारद है | जैसे कोई कहता है, 'अहिंसा परमो धर्मा', दूसरा कहता है 'सत्य ही ईश्‍वर है', तीसरा कहता है ' जो हुआ वह भी अच्छा था, जो हो रहा है वह भी अच्छा है, और जो होगा वह भी अच्छा होगा | इसी प्रकार हम क‍ईं बार बड़े चाव से कुछ दोहों को दोहराते हैं जैसे, 'अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गये सबके दाता राम, इत्यादि इत्यादि | अब इन सब में अछी बात होते हुए भी कुछ कमियां हैं, और वह ऐसी कमियां हैं जिनसे सारा का सारा किस्सा ही बदल जाता है | अतः हमें शिक्षा के लिए सर्वप्रथम वेद का ज्ञान प्राप्त करना चाहिये, तत्‍पश्चात ही अन्य शास्त्रों को पढ़ना चाहिए |

आनन्द‌

मन्यवर

मन्यवर आनन्दजी, नमस्ते|

आपने वेद की शिक्षाओं में Anti Virus अंतर्निहित है जो अन्य ग्रन्थों में नदारद है लिखकर वेद को सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचा दिया | महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज ने भी सत्य सनातन वैदिक धर्म विश्व के समस्त मत मतान्तरों, मजहबों और सम्प्रदायों से करोड़ों वर्ष पूर्व का बतला कर वेद को संसार का प्रथम ग्रन्थ मानकर वेदों की उपेक्षा न करने की प्रेरणा दी है | आनन्दजी आपने टिप्पणी में इतना सुन्दर वाक्य लिख कर वेदों के महत्व को ऊँचाई के शिखर पर पहूंचा दिया है और जो वेद प्रिय है वही मेरा भी सबसे प्रिय है आनन्द जी आनन्द आ गया, धन्यवाद |

आनन्दिता सदा भुया:
शुभेच्छु
राजेन्द्र आर्य‌