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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

प्रेरक प्रसंग : आस्था का सही अर्थ‌

प्रेरक प्रसंग
आस्था का सही अर्थ

गुरु जी प्रवचन कर रहे थे- ""ईश्वर में आस्था बनाये रखो। ईश्वर सबकी रक्षा करता है।""

चेला एकाग्रचित होकर एक-एक शब्द को हृदय में उतार रहा था। दूसरे दिन चेला जंगल से गुजर रहा था। सहसा एक आदमी सामने से दौड़ता हुआ आया। वह चिल्ला रहा था- ""बचो ! बचो! पागल हाथी इधर ही आ रहा है।'"

चेले ने मन ही मन गुरु जी के शब्द दोहराये थे- ""ईश्वर सबकी रक्षा करता है।'" और चेला निर्भीक होकर चलता गया। थोड़ी देर बाद सामने से पागल हाथी चिंघाड़ता हुआ आया और चेले को धक्का देता हुआ भाग गया। चेला बाल-बाल बच गया और चोट खाकर आश्रम में पहुंचा। गुरु जी के समक्ष चेले ने शंका प्रकट की- ""मैंने ईश्वर में आस्था बनाये रखी, लेकिन ईश्वर ने मेरी रक्षा नहीं की।''

गुरु जी ने कहा, ""ईश्वर में तुम्हारी आस्था का ध्यान रखकर ही एक रक्षक तुम्हें चेतावनी देने के लिए गया, लेकिन तुम नहीं चेते और बढ़ते चले गये। फिर भी पागल हाथी ने तुम्हें चोट पहुंचाकर ही छोड़ दिया, अन्यथा वह तो तुम्हें कुचलता हुआ चला जाता। ईश्वर में आस्था रखो और उसके द्वारा दी गई चेतावनी को समझने का प्रयास करो। वह सबकी रक्षा करता है।"l

प्रेरक वाक्य

मनु महाराज का आदेश है कि प्रातः ब्रह्ममुहुर्त में उठकर धर्म, अर्थ, शरीर के दोष और उनके कारण तथा वेदों का चिन्तन करना चाहिए। प्रातःकाल शीघ्र उठने के अनेक लाभ हैं। प्रातः स्वास्थ्यप्रद वायु चलती है। इसके सेवन से स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

प्रेषक :

राजेन्द्र आर्य‌