Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

राजद्रोह नहीं विद्रोह‌

राजद्रोह नहीं विद्रोह

सन्‌ 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के वीर मंगल पांडे को फांसी की सजा सुनाने से पहले उनसे कहा गया कि वे माफी मांग लें । मंगल पांडे ने पूछा-"" किस बात के लिए माफी मांगू ।'' जेलर ने कहा-""तुमने राजद्रोह किया है ।'' मंगल पांडे ने अविचल स्वर में कहा, "" मैं फिरंगियों को इस देश का राजा नहीं मानता हूँ । इसलिए राजद्रोह का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता । मैं उन्हें देश का शत्रु मानता हूँ । उन्होंने मेरे देश पर अधिकार किया है और मैं उनको यहॉं से निकाल बाहर करना चाहता हूँ । मैंने राजद्रोह नहीं विद्रोह किया है । इस अपराध के लिए हर सजा मुझे मंजूर है ।''

प्रेषक :

राजेन्द्र आर्य‌