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AryasamajOnline |
' क्रोध 'क्रोध कभी भी आ जाता है न समय देखकर ही आता है जब कुछ भी गड़बड़ हो जाती लम्बे उसके पाँव बहुत हैं उलझन जैसे ही दिखती है पहले इससे सोच सकें हम हो घायल उसके प्रहार से बचना हो गर, तुम्हें क्रोध से रखना होगा बाहर मन से यह कहना आसान बहुत है जब तक, न शान्त मन प्रभू प्रेम में जाए डूब मन के भीतर चलती जाए योउस्मान् द्वेष्टी यं वयं तब तक, न राहत मुमकिन है जिसकी साख बहुत गहरी है।। |