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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : रजनी प्यारी

सामवन्दना : रजनी प्यारी

ओ३म् आ प्रागाभ्दद्रा युवतिरहृ: केतून्त्समीत्र्सति |
अभूभ्दद्रा निवेशनी विश्वस्य जगतो रात्री || साम ६०८ ||

हे रजनी प्यारी शान्तिवती, ऐसा विशिष्ट आगमन करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||

दिन के प्रकाश में दुनिया के,
धन हीन दीन या धनिया के,
बहुरूप रंग दिखला‍ई दें
अवगुण सद्‍गुण हर दुनिया के |

सब ही समतुल्य दिखा‍ई दें, मतभेद अहम् के हरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो||

यह रत्रि भद्र है युवती है,
दिन मान दिव्यता धरती है,
दे मोद गोद विश्राम शोध
सब श्रान्ति जगत की हरती है|

शुभ निशा शयन दे दिन उद्‍यन, हे रात्रि हमें निज शरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||

वस विषय वसाओ रात्रि नहीं,
विष विषय बनाओ रात्रि नहीं,
यम नियम और शिव संयम हो
तुम पाप बढ़ाओ रात्रि नहीं |

बल रात्रि ग्रहण दिन में वितरण, हे रात्रि भद्र आचरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||

सामवन्दना

सामवन्दना : रजनी प्यारी

ओ३म् आ प्रागाभ्दद्रा युवतिरहृ: केतून्त्समीत्र्सति |
अभूभ्दद्रा निवेशनी विश्वस्य जगतो रात्री || साम ६०८ ||

हे रजनी प्यारी शान्तिवती, ऐसा विशिष्ट आगमन करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||

दिन के प्रकाश में दुनिया के,
धन हीन दीन या धनिया के,
बहुरूप रंग दिखला‍ई दें
अवगुण सद्‍गुण हर दुनिया के |

सब ही समतुल्य दिखा‍ई दें, मतभेद अहम् के हरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो||

यह रत्रि भद्र है युवती है,
दिन मान दिव्यता धरती है,
दे मोद गोद विश्राम शोध
सब श्रान्ति जगत की हरती है|

शुभ निशा शयन दे दिन उद्‍यन, हे रात्रि हमें निज शरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||

वस विषय वसाओ रात्रि नहीं,
विष विषय बनाओ रात्रि नहीं,
यम नियम और शिव संयम हो
तुम पाप बढ़ाओ रात्रि नहीं |

बल रात्रि ग्रहण दिन में वितरण, हे रात्रि भद्र आचरण करो |
जिससे कल्याण हमारा हो, हे रात्रि वही बल भरण करो ||