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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : आयुष्य पुनीत‌

आयुष्य पुनीत

ओ३म् अग्न आयुंषि पवस आसुवोर्जमिषं च न:|
आरे बाधस्व दुच्छुनाम् || साम ६२७ ||

ओ३म् प्राण प्रिय दु:ख विमोचक, हे सुखदायक उत्थान करो |
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ||

आयुष्य पुनीत देव करते,
वे शुद्ध जगत जीवन करते,
बल भली भाँति प्रभु हमको दो
प्रभु यही प्रार्थना हम करते |

देकर अन्नादि भोग्य वैभव, हे देव हमें बलवान करो |
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ||

बाहर आयें जो बाधायें,
उनपर आरी ही चल जाये,
बढ़ गये दोष कुविचारों को
अन्तर्मन से नाथ हटायें |

इसीलिये यह आहुति अर्पण, यह जीवन स्वच्छ महान करो |
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ||

हव्य तुम्हारा नहीं हमारा,
तुम्हें समर्पित हव्य तुम्हारा,
तुम्हें पता हर आवश्यकता
वही हमें दो भोग्य हमारा |

हटे बुरा‍ई, अच्छा‍ई हो, प्रभु यथा योग्य अनुदान करो |
करो हमारा जीवन पावन, हे ओ३म् सदा कल्याण करो ||

(सामवन्दना : पं. देव नारायण भारद्वाज )

Rajendraji Namaskar This is

Rajendraji Namaskar
This is not connected to your article above.
1. How can we practice brahmachraya , what are the foods that would help us or that we should avoid ?.
2.I take cows milk .What can I suggest to my milkman in terms of food and other conditions for the cow that would enhance the quality of milk?

Thanking you & Regards
Lalit

श्रीमान

श्रीमान ललितजी, नमस्ते ।

आपकी टिप्पणी सामवन्दना : आयुष्य पुनीत विषय से सम्बन्धित नहीं है अत: मैं इसका
क्या उत्तर दूँ ? फिर भी टिप्पणी के लिये धन्यवाद ।
आप गाय क दूध सेवन करते हैं यह बड़ी अच्छी बात है और आयुर्वेद में गाय के दूध को अमृत
माना गया है और आप भाग्यशाली हैं ।

धन्यवाद ।

शुभेच्छु:

राजेन्द्र् आर्य
9041342483

Bahut bahut dhanayavad

Bahut bahut dhanayavad ...par sir mere prahan ka jawab poora nahi aaya.
Phir bhi apko dhanyavad

नमस्ते

नमस्ते