महर्षी दयानन्द की विशेषताएँ
लेखक- डा.महेश विद्यालंकार
1. कपिल, कणाद एवं गौतम जैसा पाण्डित्य, हनुमान और भीष्म जैसा चमकता हुआ ब्रह्मचर्य , गौतम बुद्ध तथा महावीर जैसा त्याग और वैराग्य, श्रीरामचन्द्र जैसी मर्यादा, श्रीक्रिष्ण जैसी नीतिमत्ता, पातंजलि व व्यास जैसी आध्यात्मिक्त्ता आदि गुणो से विभूषित नाम महर्षि दयानन्द है।
2. ऋषिवर! सत्य सनातन वैदिक धर्म के पुनरुद्धारक, प्रचारक तथा प्रसारक थे. वे सत्य के शोधक, सत्यवक्त्ता, सत्य प्रचारक एवं सत्य हेतु शहीद हुए ।
3. उस महामानव का व्यक्त्तित्व और क्रितित्व चुम्बकीय था । जो भी सम्पर्क में आया प्रभावित हुआ। उनमें अद्भुत चरित्र बल था ।
4. उस पुण्यात्मा ने अपने लिए न कुछ चाहा, न माँगा और न ही संग्रह किया। संपूर्ण जीवन मानवता के लिए समर्पित किया। वे प्रभु इच्छा के लिए जिये।
5. उनका कहना था- मेरा उद्येश्य कोई नया पंथ मजहब या सम्प्रदाय चलाने का नहीं है। मैं तो ब्रह्मा से लेकर जैमिनी ऋषि पर्यन्त जो सत्य सनातन वैदिक है उसी को प्रकाशित
व प्रसारित करना चाहता हूँ ।
6 वेदों की और लौटो । वेदों की मानो । सम्प्र्दाय को छोड़ो । धर्म को समझो और उसका पालन करो । ऋषिवर ने वेदों का उद्धार किया । वोदों को ईश्वरीय ग्यान के पद पर प्रतिष्टित कराया और वेदों का यथार्थ स्वरूप जनता के सामने रखा ।
7. ऋषि दयानन्द ने जीवन और जगत में व्याप्त अग्यान, अन्धविश्वास,गुरुडम , ढोंग, मूर्तिपूजा, अवतार आदि का तर्क, प्रमाण विग्यान और युक्ति के आधार पर विरोध किया । उन्होंने वेद विरुद्ध और् असत्य बातों से कभी समझौता नहीं किया ।
8 . इतिहास में ऋषि दयानन्द की अपनी पहचान है । संसार के मह्ह्पुरुषों को तराजू के एक पलड़े पर रखा जाए और् ऋषि को दूसरे पर तो निश्चय ही ऋषि का पलड़ा भारी होगा । क्योंकि उनके जीवन में आद्यन्त किसी प्रकार का दोष, दुर्बलता व न्यूनता नहीं थी ।
