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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : स्तुतियों में रम जाओ

स्तुतियों में रमजाओ

ओ३म् अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्य दातये|
नि होता सत्सि बर्हिषि||साम १ ||

प्रभु मेरे प्यारे आ जाओ, गीत स्तुतियों में रम जाओ|
यह हृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु गीत स्तुति का श्रवण करो,
यह सफल सुजीवन हवन करो,
मेरी दु:ख पीड़ा हरने को
हे ईश्वर तुम आगमन करो|

हर हव्य भोग के दाता हो, निज हव्य हमें भी दे जाओ|
यह हृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु वसुधा के ओर छोर से,
इस जीवन के सभी ओर से,
प्रभु आओ सन्ताप मिटाओ,
अपनी सुखदा कृपा को से|

हो भक्ति मगन वन्दना करूँ, प्रार्थना दयाकर सुन जाओ|
यह हृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु तुम्हीं हमारे होता हो,
कामना पूर्ति के स्त्रोता हो,
मम हृदय यज्ञ का कुण्ड बना,
गीत तुम्हीं, तुम ही श्रोता ह्प्|

मम हृदय यज्ञ का मन्दिर है, प्रभु आहुति लेकर रम जाओ|
यह हृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ