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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : जीवन अभिनय‌

ओ३म् इन्द्र इन्नो महोनां दाता वाजानां नृतु:|
महाँ अभिज्ञवा यमत्||साम ७१५||

प्रभु स्वीकृत यही विनय हो,
यह जीवन तेरा अभिनय हो||

तू इन्द्र महा ऐश्वर्यवान,
तू सर्वेश्वर है शक्तिवान,
महनीय तेज का दाता तू
हमको भी करता युक्तिवान|

प्रभु भक्तों पर सदा सदय हो,
यह जीवन तेरा अभिनय हो ||

याचना देव से वाँच रहे,
जग में हमजी भर नाच रहे,
हम नर्तन- वर्तन में स्वतन्त्र
प्रभु नाच हमारा जाँचरहे |

किस समय कौन कैसी लय हो |
यह जीवन तेरा अभिनय हो||

नियम भंग यदि होता नर्तन,
प्रभु करते प्रेरित परिवर्तन,
जो नहीं प्रेरणा को सुनता
उस पर यम का कसे प्रवर्तन|

सृजन पाल‌ना या कि प्रलय हो|
यह जीवन तेरा अभिनय हो||