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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सहारा प्रभु का

सहारा प्रभु का

ओ३म् यस्मिन्विश्वा अधि श्रियो रणन्ति सप्त संसद:|
इन्द्रं सुते हवामहे || साम ७२३ ||

प्रभु से ही मिला सहारा है |
प्रभु को इसलिए पुकारा है ||

प्रभु में सुख श्रेय रमण करते,
जग में अभ्युदय वही करते,
वही वासना विषय हटा कर
प्रभुवर नि:श्रेयस भी वरते |

सर्वेश्वर सृजन सितारा है|
प्रभु को इसलिए पुकारा है ||

प्रभु का कितन बड़ा राज्य है,
श्री लक्ष्मी का साम्राज्य है,
प्रभुवर कि प्रिय सत्ता में ही
सरस्वती का भी सुराज्य है |

प्रभु का असीम विसतारा है |
प्रभु को इसलिए पुकारा है ||

सब सात लोक की सत्तायें,
या सात स्वरों की महिमायें
प्रिय सप्त पुरोधा मेधा
फिर कौन अछूती रह जयें |

संसद की स‍गत धारा है |
प्रभु को इसलिए पुकारा है ||