एक बार दो घनिष्ठ मित्र यात्रा पर निकले | उनकी किसी बात पर लड़ाई हो गई |दूसरे मित्र ने क्रोध में
आकर पहले मित्र को थप्पड़ लगा दिया | पहले मित्र ने रेत पर उदास मन से लिखा="आज मेरे सबसे
अजीज दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा"| फिर दोनों आगे चल पड़े | कुछ ही दूर बढ़े थे कि रास्ते में एक
नदी आ गई | दोनों नदी में उतरे | लेकिन पानी गहरा था| पहले मित्र को तैरना नहीं आता था, अत:
वह डूबने लगा | दूसरे मित्र ने झट उसके पास पहुँच कर उसकी बाजू पकड़ ली और फिर अपने सहारे उसे
नदी पार कराई |
तब पहले मित्र ने पत्थर पर लिखा, "आज मेरे प्यारे मित्र ने मेरी जान बचाई|"
भावार्थ : दूसरे के द्वारा किये गये अपकार को रेत पर लिखे के समान तुरन्त भुला दो और उपकार
को पत्थर पर लिखे के समान सदा याद रखो |
राजेन्द्र आर्य
नमस्ते,
नमस्ते, राजेन्द्र जी
आपने बहुत सुंदर बात कही है।