Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : शक्ति वृषन् की

सामवन्दना

शक्ति वृषन् की

ओ३म् वृष्णते वृष्ण्यं शवो वृषा वन वृषा सुत:|
स त्वं वृषन्वृषेदसि || साम ७८२||

हे वृषन्। तुम्हारा जल वर्षण |
दे रहा हमें है शक्ति सघन ||

वृषन् तुम्हारा नाम पड़ा है,
वषन् युम्हारा काम बड़ा है,
तुम वृषन् जगत वर्षाकारी
वर्षा से जगधाम खड़ा है|

इस वर्षा से हो जग तर्पण |
दे रहा हमें है शक्ति सघन||

भण्डार अपार तुम्हारा है,
यह प्यासा कण्ठ हमारा है,
कुछ एक कण्ठ की बात नहीं
यह तृषित जगत ही सारा है|

हो जग वर्षा आनन्द मगन|
दे रहा हमें है शक्ति सघन||

बस एक वृष्टि पर्याप्त नहीं,
इस से हो कुछ भी प्राप्त नहीं,
ज्ञान बिन्दु हो कर्म सिन्धु हो
प्रभु भक्ति मेघ में व्याप्त रही|

हो वृष्टि धर्म की सृष्टि वृषन्|
दे रहा हमें है शक्ति सघन ||

राजेन्द्र आर्य‌

मान्या

मान्या मातृशक्ति एवं आर्य बन्धुओ, नमस्ते |

अति आवश्यक निवेदन है कि नित्य दैनिक यज्ञ करें एवं सामवन्दना के एक मन्त्र की
आहुति श्रद्धापुर्वक दें| श्रद्धेय पं. देवनारायण भारद्वाज रचित "ओ३म् सुमित्रा, सोम नो भव"
"सामवन्दना" काव्यमय सामवेद के ११७ मन्त्रों में से ६८ मन्त्र पद्दानुवाद सहित प्रकोष्ठ
"सामवन्दना" में मैने लिख दिये हैं आशा है आप मेरे इस परिश्रम का अवश्य लाभ प्राप्त करेंगे
जबरदस्त अति आनन्द की अनुभूति से आपका जीवन उत्कृष्ट होगा| धन्यवाद|
आप सब से मेरा एक निवेदन है कि आप सब अपनी अनुभूति टिप्पणी अवश्य लिखे‍गे |

शुभेच्छु:

राजेन्द्र आर्य
मकान नं362 ए, गुरु नानक पुरा, सुनामी गेट,
संगरूर 148001 (पंजाब)

चलभाष: 90413 42483
ईमेल: rajenderarya49@gmail.com

आचार्य

आचार्य जी
बहुत् 2 धन्यवाद | आपके आदेश का पालन करने का यथाशक्ति प्रयास हम अवश्य करेंगे |
आनन्द‌