Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : साथ साथ रसपान‌

साथ साथ रसपान:

ओ३म् मित्रं वयं हवामहे वरुणं सोम पीतये|
वा जाता पूतदक्षसा || साम ६९३ ||

हम सखा सखा का मान करें |
हम साथ साथ रसपान करें ||

मित्र वरुण गठबन्धन देखो,
वाष्प तेज जल उदयन देखो,
प्रिय प्राण अपान समन्वय से
नित्य प्रकृति के नर्तन देखो|

परमात्म आत्म अभियान करें |
हम साथ साथ रस पान करें ||

हमने प्रभु का आह्वान किया,
निज सखा भाव का मान किया,
उसने हमको जब साथ लिया
हमने उसका रसपान किया |

अपनत्व यही गतिमान करें |
हम साथ साथ रस पान करें||

उससे पवित्रता उससे बल,
प्रभु से लेकर हम हुए सबल,
उसका बल उसकी जनता में
हम वितरित करते हैं अविचल|

बल उसका हम यशवान करें |
हम साथ साथ रस पान करें ||

राजेन्द्र आर्य‌

बहुत ही

बहुत ही उत्तम आवाहन है इस साम गान में !

बह्त् 2 धन्यवाद

आनन्द‌