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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना: हमारी रक्षा

हमारी रक्षा

ओ३म् इन्द्रे अग्ना नमो बृहत सुवृक्तिमेरयामहे ।
धिया धेना अवस्यव: ।।साम ८०० ।।

यही हमारी उत्कट इच्छा ।
हे नाथ हमारी हो रक्षा ।।

इन्द्र अग्नि हैं नाम तुम्हारे,
शक्ति ज्ञान हैं काम तुम्हारे,
इनसे ही सृष्टि सृजन होता
मिलते सब परिणाम सुखारे ।

हे नाथ हमें दो यह शिक्षा ।
हे नाथ हमारी हो रक्षा ।।

उत्तम कर्मों का हो सर्जन,
सब दुष्कर्मों का हो वर्जन,
जिससे उत्साह बढ़े अपना
होवे विकास का सुख वर्णन ।

हो सफल परिक्षा की रक्षा ।
हे नाथ हमारी हो रक्षा।।

नित नमन बड़ों को हम करते,
पर तुमको बृहत नमन करते,
यह नमन दिखावामात्र नहीं
हम हृदय प्रेरणा से करते ।

दो नाथ वेद बल की भिक्षा।
हे नाथ हमारी हो रक्षा ।।

राजेन्द्र आर्य‌

कितनी

कितनी उत्तम शिक्षा है वाह वाह !

धन्यवाद, आचार्य जी

आनन्द‌