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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सन्यासी या बाबे

सन्यास लेने का अधिकार केवल ब्राह्मण को है अन्य किसी को नहीजिसे भी सन्यास लेना है उसे पहले ज़्यान द्वारा ब्राह्मण बनना पडेगा.ब्राह्मणो को भी सबको नही.जिसे वैराग्य हो वही ले सकता है.आज जितने भी भगवा कपडे मे बाबे है उनमे से एक दो प्रतिशत ही विरक्त है बाकी तीन प्रकार के बाबे ह.(1)जिनके घरो मे रोटी नही है वे रोटियो के लिये सन्यासी बन जाते है.(2)जिनके पास रोटी भी है,जमीन,जायदाद सब कुछ् है लेकिन बहुवे रोटी नही देती है उनमे से भी कुछ् बाबे बन जाते है.(3)भगवा कपडा मे जनता की श्रद्धा है तो इज्जत बटोरने व अपने पैर छुवाने के लिये बाबे बन जाते है.पूर्ण परीक्षण के बाद ही सन्यासी पर विश्वास कीजिये.एक सच्चा सन्यासी लोगो का जितना भला कर सकता है उतना सौ ग्ऋहस्थी नहै कर सकते है क्योन्कि सन्यासी पूरा समय केवल दुसरो का उपकार करने मे लगाते है.

सन्यास

सन्यास आश्रम का पालन सही विद्वानों को ही शोभा देता है ।
श्री शोभा राम भजनोपदेषक से मैने पूछा कि आप सन्यास क्यों नहीं लेते
तो उन्होंने कहा कि मैं सन्यास लेने की योग्यता नहीं रखता । अत: योग्यता प्राप्त हो जाने पर है
सन्यास लेना उचित है ।

धन्यवाद ।

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