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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

परमेश्वर के गुण प्रमाण सहित‌

लोग परमेश्वर मे बहुत विश्वास रखते है.वे परमेश्वर का नाम भी तो लेते है.लेकिन् उनसे कोई जरा जाकर पूछे की परमेश्वर क्या होता है.तो वे कुछ् नही बता सकते है.बिचारे उनको किसी ने परमेश्वर के गुण बताये नही.और् यदि किसी ने बताये भी है तो वे बिलकुल गलत ही बताये है.महर्षि दयानन्द एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होने हजारो वर्षो के बाद परमेश्वर के गुण सही सही बताने की कोशिश की.परमेश्वर है कैसे,वह कहा है इन चीजो के बारे मे जाने बिना हम कुछ् भी काम परमेश्वर से नही ले सकते है.जैसे कोई वैग्यानिक किसी पदार्थ का उपयोग दवा के रूप मे तभी कर सकता है जब वह उस पदार्थ के बारे मे जानता हो.यदि कोई व्यक्ति किसी पदार्थ के बारे मे नही जानता है तो वह उसका ऐसा इसेमाल कर सकता है जिससे उसका नुकसान हो.तो अतः हमे परमेश्वर के गुण जानने चाहिये.कुछ् गुण मै आपको पूरे प्रमाण सहित बता रहा हू:
(1)जैसे किसी घडे को कुम्हार मिट्टी से बनाता है और् वह घडा बिना बनाये बनता भी नही है.तो वैसे ही किसी ने इस जगत को भी रचा है.जिस किसी ने भी इस जगत को रचा है उसका नाम हम परमेश्वर कह देते है.
(2)परमेश्वर ने इस जगत को रचा है यह हम पक्के प्रमाण के साथ कह और् लिख भी सकते है.और् यह जगत.यह जगत कितना विशाल है.आज के वैग्यानिक यह पूरे प्रमाण के साथ कहते है कि यह ब्रह्माण्ड अनन्त है.तो यानी इसमे अनेक पिण्ड‌ है.उन पिण्डो को परमेश्वर ने रचा है.हम यदि एक मकान को बनाये तो वर्षो लग जाते है.और् फिर इस धरती को बनाने के लिये कितने आदमीयो को लगाना पडेगा.फिर इस ब्रह्माण्ड को बनाने मे कितने लगेगे.उत्तर है असम्भव.क्योकि अनन्त मनुष्य‌ तो है ही नही.तो यानी परमेश्वर मे इतनी शक्ति है कि वह इस अनन्त ब्रह्मन्ड को रछ सकता है.तो यानी परमेश्वर मे अनन्त सामर्थ्य है.अतः वह सर्वशक्तिमान है.
(3)परमेश्वर ने यह जगत को बनाया है.यह जगत कुछ् नियमो के हिसाब से ही चलता है.नयमौ के विरुद्ध कभी नही चलता है.जैसे किसी गेन्द को हव मे छोड दिया जाय तो वह नीचे ही गिरती है.ऊपरनही जाती है.तो यानी यह ब्रह्माण्द कुछ् नियमो के हिसाब से ही चलता है.फिर ये नियम किसने बनाये है?क्या इस जड प्रक्रिति ने अपने नियम स्वयम् ही बनाये है?नही.क्योकि ये जड पदार्थ है और् जड पदार्थ अपने आप नियम नही बना सकता है क्योकि इसमे बुद्धि नही होती है.अतः यह नियम भी परमेश्वर ने ही बनाये है.क्योकि यह सब जगत परमेश्वर ने ही रचा है.और् किसी ने तो रचा नही है.और् किसका इतना साम्र्थ्य है जो उन असन्ख्य पदार्थो के नियम बना सके.तो अतः वे नियम इस जगदीश्वर ने ही बनाये है.और् वैग्यानिक लोग इन पदार्थो को देख देख के ही ग्यान ले पाते है.लेकिन किसी भी वैग्यानिक के पास उतने पदार्थो के बारे मे नही है जितने पदार्थ इस सन्सार मे है.अतः परमेश्वर सबसे अधिक ज्यानी है.
तो परमेश्वर सर्वज़्य‌ है.
(4)जो काम हम करते है उसका कुछ निश्चित फल होता है.तो वह फल कौन देता है?वह फल परमेश्वर देता है.अतः परमेश्वर सबको फल देने हारा है.
(5)बुरे कर्म का फल बुरा होता है और् अच्छे कर्म का फल अच्छा होता है.जो बुरा फल पाता है वह दुख पाता है और् जो अच्छा फल पाता है वह सुख पाता है.तो जो बुरे कर्म करता है उसको परमेश्वर रुलाता है और् जो अच्छे कर्म करता है परमेश्वर उसको हन्साता है.
(6)हम जो करते है परमेश्वर उसको फल देता है.जो पढाई करता है उसको ग्यान मिलता है.जो खोज करता है उसको नया ग्यान मिलता है.पढने वाले तो किताब से ग्यान लेते है.और् किताब मे वह ग्यान किसी व्यक्ति ने अनुभव से ही लिखा है.तो यानी हर ग्यान का कारण परमेश्वर है.परमेश्वर ज़्यान भी देता है.
( 7)पेट मे जो पाचन क्रिया हो रही है वह भी परमेश्वर की वजह से ही हो रही है.और् जितनी भी कोशिकाये है उन सब मे परमेश्वर ही क्रिया करा रहा है.तो परमेश्वर हमारा पोषण कर रहा है.
(8)जिस तरह या जिन नियमो से वर्षा होती है वह भी सब परमेश्वर ने ही रचे है.और् परमेश्वर उन क्रियाओ को करवा रहा है.अतः परमेश्वर जल देता है.
(9)जिस क्रिया से वायू ग्रहण करने से सुख मिलता है वह भी परमेश्वर ही करता है.और् वायू ग्रहण करने से सुख मिलता है.अतः परमेश्वर सुख देता है.
(10)चूकी परमेश्वर हमारे कर्मो का उचित फल देता है तो यानी परमेश्वर हमको हर क्षण देख रहा है.

इस गूढ़

इस गूढ़ दार्शनिक ज्ञान के लिये बहुत बहुत धन्यवाद
यह सब स्वाध्याय का ही परिणाम है जो सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका आदि ग्रन्थों का स्वाध्याय
करता है उसे ऐसा ही श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त होता है धन्यवाद |

शुभेच्छु:

राजेन्द्र आर्य‌

Namastey aryas, vinay

Namastey aryas,
vinay arya, you really give sensible evidences of existence of parmeshwar.we really enjoyed your article.
Dhanyavad.