Skip navigation.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सामवन्दना : रहो सावधान‌

ओ३म् भद्रा वस्त्रा समन्या३वसानो महान् कविर्निवचनानि शंसन् ।
आ वच्यस्व चम्वो: पूयमानो विचक्षणो जागृविर्देववीतौ ।। साम १४०० ।।

हो छोटा बड़ा काम कोई, महायुद्ध या व्यवहार आम ।
हर समय रहे तू सावधान, वर्चस्व तभी हो सफल काम ।।

हो हृदय भाव तेरे महान,
हो क्रान्ति दृष्टि कवि के समान,
तन मन भी तेरा पावन हो
हो मृदु मोहक प्रवचन गान ।

फिर भी आ जाये प्रमाद नहीं, श्रमशील क्रिया तन बने धाम ।
हर समय रहे तू सावधान, वर्चस्व तभी हो सफल काम ।।

हो गया जन्म सो जीना है,
मरने तक खाना पीना है,
मत लक्ष्यहीन हो दृष्टिकोण
जीना कर सुयश पसीना है ।

रहे विचक्षण बने विलक्षण, संकल्प शक्ति ले हाथ थाम ।
हर समय रहे तू सावधान, वर्चस्व तभी हो सफल काम ।

हो नहीं उदासी आस पास,
हो जागरुकता का निवास,
भद्रता पूर्ण परिधान रहे
हो नहीं हेय फैशन लिवास ।

तेरा हर चाल चलन तुझको, दे जाय दाम मत बने वाम ।
हर समय रहे तू सावधान, वर्चस्व तभी हो सफल काम ।।

राजेन्द्र आर्य‌