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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्य बनने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है योग‌

आर्य एक वैदिक शब्द है जिसका अर्थ होता है श्रेष्ठ.एक श्रेष्ठ व्यक्ति मे गुण ही गुण होते है.एक श्रेष्ठ व्यक्ति पूरी दुनिया को एक अच्छी राह दिखा पाता है.वह बहुत ऊन्चाईयो को छू जाता है.एक श्रेष्ठ व्यक्ति दूसरो का सदा परोपकार ही करता है.अब श्रेष्ट बनने का क्या उपाय है,यह मै महर्षि पतनजलि जी के योग दर्शन से कुछ् उपाय बताता हू.
मुझे सन्स्क्ऋत व्याकरण नही आती है लेकिन मै बात पूरे प्रमाण के साथ कह सकता हू.जिन जिन योग सूत्रो का प्रकाश मै यहा करूगा वह महर्षि दयानन्द जी द्वारा रचित "ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका" के 'उपासना' नामक समुल्लास से कहूगा.
(1)योगश्चितव्ऋतिनिरोध:.(सर्वप्रथमयोगसूत्र)
अर्थ:चित की व्ऋतियो को बुराईयो से हटा के,शुभ गुणो मे स्थिर करके,परमेश्वर के समीप मे मोक्ष को प्राप्त करने को 'योग' कहते है.और् वियोग उसको कहते है कि परमेश्वर और् उसकी आग्या से विरुद्ध बुराईयो मे फस के उससे दूर हो जाना.

जब व्यक्ति चित की व्ऋतियो को सही मार्ग पर ले जाता है तब वह व्यक्ति केवल शुभ कर्म ही करता है.जो ये शुभ कर्म है ये ऐसे होते है जिनसे व्यक्ति की उन्नति होती है,दुसरो का उपकार करता है,दुनिया को एक अच्छि राह दिखा पाता है.
जिससे यह स्पष्ट होता है कि योग से व्यक्ति श्रेष्ठ बन जाता है.

(2)यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोअष्टावङानि.(योग 2.29)
अर्थ:योग के आठ अङ है.
(क)यम.(ख)नियम.(ग)आसन.(घ)प्राणायाम.(ड्)प्रत्याहार (च)धारणा (छ)ध्यान (ज)समाधी

(3)तत्राहिन्सासत्यास्तेयब्रह्मचर्यपरिग्रह यमा:.(योग 2.30)
अर्थ:यम पान्च प्रकार के होते है.
(क)सत्य:जैसा अपने ग्यान मे हो,वैसा ही करे,बोले और् माने.
(ख)अहिन्सा:सब प्रकार से,सब काल मे,सब प्राणियो के साथ,वैर छोड के प्रेम प्रीति से वर्तना.
(ग)अस्तेय:पदार्थवाले की आग्या के बिना किसी पदार्थ की इच्छा भी न करना
(ख)ब्रह्मचर्य:उपस्थेन्द्रिय का सयम,अष्टमैथुन का सर्वथा त्याग.विवाह के पीछे भी ऋतुगामी बने रहना,विद्या का पढना पढाना
(ड्)अपरिग्रह:अभिमानादि दोषो से रहित होना.

(4)शौचसन्तोष:स्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि नियमा:.(योग 2.32)
अर्थ: (क)शौच:शौच यानी शुद्धि.वह दो प्रकार की होती है.एक बाहर कि दूसरी अन्दर की.बाहर की शुद्धि स्नान से.अन्दर की शुद्धि धर्माचरण,सत्यभाषण,सतसङ आदि से.
(ख)सन्तोष:भयन्कर पुरुषार्थ यानी पूरा जोर लगाकर कर्म करने पर जो फल मिलता है उसी से सन्तुष्ट हो जाना.
(ग)तप:इतना भयन्कर मेहनत जैसे आप अग्नि मे तप कर मलरहित होने वाले हो.
(घ)स्वाध्याय:आर्ष ग्रन्थो का सङोपाङ अध्ययन.
(ड्)ईश्वरप्रणिधान:ईश्वर को समर्पित करना.

(5)प्रच्छर्दनविधारणाभ्याम् वा प्राणस्य.(योग 1.34)
अर्थ:प्राण को अन्दर बाहर रोकने को प्राणायाम कहते है.
श्वास को पूरा भरकर वही रोक देना प्रथम प्राणायाम.
श्वास को पूरा भरकर पूरा छोड कर बाहर ही रोक देना द्वितीय.
श्वास जहा पर है उसको वही पर रोकते रहना तीसरा.
श्वास जब अन्दर आवे तब बाहर फेकना और् जब बाहर आवे तब अन्दर लेना चतुर्थ.

(6)तत्र स्थिरसुखमासनम्.(योग 2.46)
अर्थ:जिसमे सुखपूर्वक‌ शरीर और् आत्मा स्थिर हो,उसको आसन कहते है.

(7)स्वविषयासम्प्रयोगे चित्त्स्य स्वरूपानुसार इवेन्द्रियाणाम् प्रत्याहार:.(योग 2.54)
अर्थ:अपने मन को जीत लेने से सारी इन्द्रिया अपने वश मे आ जाति है उसी का नाम प्रत्याहार है.
ऐसा करने से जहा पर भी हम मन को लगाना चाहेगे वह वहा पर लग जायेगा.

(8)देशब‌न्धस्चित्तस्य धारणा.(योग 3.1)
अर्थ:मन को चन्चलता से छुडा के नभि,ह्ऋदय,मस्तक,नासिका और् जीभ के अग्रभाग आदि देशो मे स्थिर कर देना.
(9)तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्.(योग 3.2)
अर्थ:धारणा हो जाने के पश्चात प्रमेश्वर और् वेद पर चिन्तन करना.उस मे इस प्रकार प्रविष्ट हो जाना जैसे नदी समुद्र मे प्रविष्ट हो जाती है.यही ध्यान है.
(10)तदेवार्थमात्रनिर्भासम् स्वरूपशून्यमिव समाधि:(योग 3.3)
अर्थ:ध्यान हो जाने के पश्चात अपने आप को भूलकर केवल और् केवल उसी प्रमेश्वर और् उसके ग्यान मे मग्न हो जाने को समाधि कहते है.

तो इस प्रकार जो भी इन योगङो का अनुष्ठान करेगा वह आर्य अर्थात् श्रेष्ठ क्यो न बन सकेगा.
आप इन सभी अङो पर पूरी गहनता से विचार करे.

धन्यवाद।
विनय आर्य‌

Namastey Vinay Aryaji,

Namastey Vinay Aryaji,
Those were really essential information about greatness of "Arya".

We have seen throughout history many correct & incorrect interpretation of aryas. Adolf hitler of germany was also considering whole the community of german people including himself as the only pure arya cast in the world. Although he was totally wrong.The true aryas were sree krishna, sri ram, maharshi dayanand saraswati, sardar vallabhbhai patel, bhagatsingh, sukhdev, lala lajpatrai, rajguru, guru govind singh etc. legends of our history.

So, in this article it is true & proper definition of arya is given. I have seen many in world , especially in india , misinterpreting definition of arya . Some people say aryas are just north indians, while south indians are not aryas because they are dravids!! Rest of the world should also figure out cogent meaning of aryas ,also should try to become arya rather than considering arya samaj as religious group & vedic dharma as "Religion".

Therefore guyz please stop talking about those discrimination isuues with which we are suffering from mahabharata , that's enough now ,lets set of good people try to become arya & fight against evil-doers!!
Dhanyavad,
Kushal Aary.