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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महर्षि दयानन्द की मानवता को अकूत देन‌

महर्षि दयानन्द ने मानवता को अकूत देन दी है कि उनके सद्ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश शक्ति मार्ग, संस्कार विधि युक्ति मार्ग, आर्याभिविनय भक्ति मार्ग एवं ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका मुक्ति मार्ग को प्रशस्त करते हैं और इन सद्ग्रन्थों के स्वाध्याय से प्रत्येक मानव उच्चकोटि का जीवन निर्मित कर सकता है अत: मेरा तो यह मानना है कि इन ग्रन्थों के स्वाध्याय के बिना मानव ज्ञान के क्षेत्र में अन्धा ही है और जिसने इन ग्रन्थों का स्वाध्याय लग्नपूर्वक, श्रद्धापुर्वक कर लिया वह मानव ज्ञान चक्षु से युक्त हो जाता है, वेद प्रिय हो जाता है । मैंने सामवन्दना प्रकोष्ठ बनवा कर सामवेद के बहुत सुन्दर मन्त्रों का पं. देव नारायण भारद्वाज रचित काव्यानुवाद प्रस्तुत किया है जो पूर्णता की ओर अग्रसर है 15, 16 मन्त्र शेष रहते हैं और अब मैं एक नया प्रकोष्ठ "गीतस्तुति" नाम से बन्वाने का आग्रह करता हुआ महर्षि दयानन्द के भक्ति के मार्ग को प्रशस्त करने वाला सद्ग्रन्थ आर्याभिविनय के मन्त्रों क भारद्वाजजी रचित गीतानुवाद प्रस्तुत करने का विचार कर रहा हूँ आशा है प्रबुद्ध वेद प्रिय जन इन मन्त्रों का स्वाध्याय करके भक्ति सागर में गोता लगाते हुए अपने जीवन को आनन्दित करेंगे ।

सधन्यवाद

शुभेच्छु:

राजेन्द्र आर्य
9041342483
email: rajenderarya49@gmail.com

rajendrap.arya@yahoo.com

बहुत उत्तम

बहुत उत्तम आपके इन प्रयासों के लिए अति धन्यवाद !! :)

धन्यवाद

धन्यवाद कृष्ण आर्य जी
नमस्ते |

अभी तक मैं गीत स्तुति के 3 मन्त्र प्रस्तुत कर चुका हूँ सच्ची भक्ति है इन मन्त्रों में | गणेश विसर्जन में कौनसी भक्ती है समझ से बाहर है |

राजेन्द्र आर्य‌

गणेश

गणेश विषर्जन= लोगो मे इसके प्रति एक अटूट श्रधा है.मेरे शिक्षक जो कि बहुत विज्यान जानते है,फिर भी इन जैसे अन्धविश्वासो मे विश्वास रखते है.बडे बडे वैद्य,वैज्यानिक,सब अन्धविश्वासि है.

धन्यवाद।

जैसे अन्ना

जैसे अन्ना जी के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल अपने मंच से बार बार यह आह्वान करते थे कि जिस किसी को जनलोकपाल के सम्बन्ध में विचार-विमर्श करना हो,उसे हम आमन्त्रित करते हैं, वैसे ही आर्य समाज के विद्वानों को पूरी तैयारी कर ऐसा ही बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर देश-विदेश के धर्माचार्यों व धार्मिक चिन्तकों को खुल्ले दिल से आह्वान करने की आवश्यकता है कि जिस किसीको मूर्तिपूजा, अवतारवाद आदि के सम्बन्ध में हमसे विचार-विमर्श या शास्त्रार्थ करने की इच्छा हो वे पधारें । ऐसा बड़ा आयोजन ही कुछ स्थायी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है ।
= भावेश मेरजा